मथुरा। जिले के मरीजों में होम्योपैथी के प्रति रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश सरकार भी इसे लेकर सजग दिख रही है। इसके कारण विभाग ने अब जिले में दो नए होम्याेपैथी चिकित्सालय खोलने का प्रस्ताव जिला योजना में भेजा है।
अब मरीजों में एलोपैथी चिकित्सा के साथ होम्योपैथी चिकित्सा के प्रति भी काफी रुझान बढ़ रहा है। निजी होम्याेपैथी चिकित्सकों के साथ सरकारी होम्योपैथी चिकित्सकों के पास भी मरीजों की लाइन लगी है। इससे अधिक लोगों तक होम्याेपैथी चिकित्सा पहुंच सके, इसके लिए दो नए होम्योपैथी चिकित्सालय खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इनमें से एक टाउनशिप क्षेत्र और दूसरा पं. दीनदयाल उपाध्याय धाम फरह शामिल है। हालांकि पहले से चल रहे अस्पतालों में ही स्टाफ की काफी कमी है। यहां तक कि कार्यालय में कोई लिपिक अथवा कंप्यूटर ऑपरेटर तक नहीं है। जबकि आजकल सभी विभागीय सूचनाएं ऑनलाइन ही मांगी जाती है।
मथुरा में पहले से संचालित हैं 16 होम्योपैथी अस्पताल
जिले में पहले से 16 होम्योपैथी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इनमें जिला अस्पताल, कलेक्ट्रेट परिसर, छटीकरा, जैंत, नैनू पट्टी, बरसाना, कोसीकलां, नौगांव, दलौता, नौहझील, बेरा, जाबरा, वृंदावन, अनौड़ा, झरौठा, रैपुरा जाट में फिलहाल होम्योपैथी अस्पताल चल रहे हैं।
13 चिकित्सक, 5 फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं 16 अस्पताल
जिले में भले ही 16 होम्योपैथी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके बाद भी होम्योपैथी अस्पतालों को स्टाफ नहीं मिल पा रहे हैं। 16 अस्पतालों में मात्र 13 चिकित्सक और 5 ही फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। अन्य तीन अस्पताल वृंदावन, छटीकरा और झरौठा (बलदेव) में नजदीक तैनात होम्योपैथी चिकित्सक को वैकल्पिक दिवस पर भेजा जाता है।
वर्जन
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों के बढ़ते रुझान को देखते हुए दो नए होम्योपैथी अस्पताल पं. दीनदयाल धाम और टाउनशिप क्षेत्र के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। इनके खुलने से स्थानीय जनता को लाभ मिल सकेगा।
-डॉ. ज्योतिशिखा, जिला होम्याेपैथी अधिकारी