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Mathura News: बांध भक्ति की डोर, चले आराध्य की ओर

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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अजन्मे के जन्म के दर्शन की अभिलाषा लिए देश-विदेश से आए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रीराधे-श्रीराधे रटते-रटते भक्त सिर पर सामान और गोद में छोटे बच्चों को लिए जन्मभूमि की ओर बढ़ते चले। कान्हा के भक्तों पर पहले बादल और फिर इंद्रदेव भी मेहरबान हो गए। जन्मभूमि में जुटे भक्त बारिश होने पर आनंदित होकर नाचने लगे और राधे-कृष्ण की जय-जयकार करने लगे।
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भक्तों की आस्था ऐसी थी कि ब्रज में कान्हा के आगमन को लेकर की गई साज-सज्जा भी जीवंत हो उठी। हर गली-मोहल्ले, मार्ग से सिर्फ राधे-कृष्ण के जयकारों की गूंज सुनाई दी। सांवरे के लिए स्वर्ग सा सजा ब्रज अल्हादित होकर नाच उठा। चौराहों-मार्गों पर सजे मंचों पर राधा-कृष्ण के रूप में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दे रहे कलाकारों के पांव इस कदर थिरक रहे थे, मानों स्वयं श्रीकृष्ण उनके बीच रास रचाने उतर आए हों।
भक्तों को कड़ी धूप व गर्मी, उमस का सामना तो नहीं करना पड़ा। मगर, लंबी दूरी तक पैदल चलकर जाने में जरूर मुश्किल हुई। हालांकि आराध्य के साथ बांधी भक्ति की डोर को पकड़कर वे चलते रहे। बस भक्तों के चेहरों पर अपने प्रभु की एक झलक पाने की अभिलाषा थी। कुछ भक्त जन्मस्थान की ओर जा रहे थे, तो कुछ द्वारिकाधीश और यमुना जी की ओर चल दिए। नजारा कुछ यूं लग रहा था, मानों हर राह अपने आराध्य से आज मिलना चाह रही हो।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गेट संख्या एक पर सुबह से रात तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। घंटों प्रतीक्षा के बाद भागवत भवन में युगल सरकार श्री राधा कृष्ण की छवि को निहार कर भक्त निहाल हो गए। इससे पहले सोमवार को सुबह होते ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गोविंद नगर द्वार पर भक्तों की कतार लगना शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, कतारें भी लंबी होती गईं।
शाम को तो यह आलम यह था कि चंद कदमों की दूरी तय करने में ही 20- 30 मिनट लगने लगे। हालत यह हो गई कि जिधर देखो उधर भक्तों की भीड़ थी। सूरज की किरणों का प्रकाश मंद होते ही जन्म स्थान भव्य रोशनी से दमक उठा। इसकी दिव्य और भव्य आभा दूर-दूर तक दिखाई दे रही थी। रात 8 बजे के बाद अपार भीड़ के कारण श्रीकृष्ण जन्मस्थान के भागवत भवन में पैर रखने तक की जगह नहीं बची।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान भागवत भवन में रात 12 बजे जैसे ही कान्हा का जन्म हुआ। श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाचने और पुष्प वर्षा करने लगे। यहां श्री राधा कृष्ण युगल सरकार की छवि देखकर भक्त नतमस्तक होते हुए आगे बढ़ते रहे। सुबह से शुरू हुआ यह दौर मध्य रात के बाद 1.30 बजे तक अनवरत चला।
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