नोएडा। भारतीय विरासत संस्थान में चल रही तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी बुधवार को संपन्न हो गई। इस दौरान भारतीय इतिहास के उपेक्षित और अनदेखे पहलुओं के बारे में बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि अभिलेख, लिपि और मुद्राएं न केवल अतीत को समझने का माध्यम हैं बल्कि भविष्य के इतिहास लेखन की दिशा भी निर्धारित करती हैं। संगोष्ठी में 30 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर संस्थान के कुलपति गुरमीत सिंह चावला, प्रो. अनूपा पांडे, मुख्य वक्ता प्रो. बीआर मणि आदि मौजूद रहे। ब्यूरो