मथुरा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण के लिए गठित आयोग की सर्वे रिपोर्ट को स्वीकार कर लिए जाने से जनपद में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। संभावना जताई जा रही है कि अब मथुरा-वृंदावन नगर निगम का आरक्षण चार्ट बदल जाएगा। इसमें पार्षद ही नहीं महापौर के लिए तय आरक्षण बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते ही पिछले दिनों प्रदेश में निकाय चुनाव रोक दिए गए थे। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में निर्धारित प्रक्रिया को न अपनाए जाने का आरोप प्रदेश सरकार पर लगा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी सर्वे के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद एक बार फिर राजनीकि हलचल शुरू हो गई है। फिर चुनाव मैदान में उतरने जा रहे राजनीतिक पहलवान ताल ठोकने लगे हैं। सामान्य वर्ग के दावेदार नगर निगम महापौर के आरक्षण में बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं। संभावना जता रहे है कि अनुसूचित जाति के लिए पिछले चुनाव में आरक्षित सीट अब सामान्य वर्ग के खाते में जा सकती है। हालांकि आरक्षण प्रक्रिया से नजदीकी से जुड़े जानकार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित सीट को अब ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होना तय मान रहे हैं। हालांकि यह तो प्रदेश सरकार द्वारा जारी होने वाली आरक्षण संबंधी अधिसूचना ही बताएगी कि आगामी समय में मथुरा महापौर की सीट किस वर्ग के खाते में जाती है।
नवंबर-दिसंबर 2022 की आरक्षण प्रक्रिया पर नजर डाले तो मथुरा-वृंदावन नगर निगम में पार्षद की 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई थीं, जिसमें चार महिलाएं भी शामिल थीं। इनके अलावा 18 सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थीं, जिसमें 6 महिलाएं थीं। 14 सीटें अनारक्षित महिला वर्ग के लिए थीं। अब इसमें कितना परिवर्तन होगा, यह जल्द ही स्पष्ट हो जाएगा। नगर निगम अंतर्गत अनुसूचित जाति की जनसंख्या 15 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 26.10 प्रतिशत के करीब बताई गई है।