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यूपी: नागर शैली में बना है अयोध्या में श्रीराम मंदिर, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से अद्भुत जुड़ाव

Fri, 12 Jan 2024 03:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

1983 में जब श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ तो उसी समय निश्चय किया गया था कि इसी प्रकार का भव्य मंदिर अयोध्या में प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान पर बनवाया जाएगा।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जन-जन के आराध्य श्रीकृष्ण और प्रभु श्रीराम का अद्भुत जुड़ाव है। दोनों के भव्य मंदिर नागर शैली में बने हैं और स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है। दिलचस्प यह है कि जिस वक्त अयोध्या में श्रीराम को जन्मस्थान दिलाने के लिए ब्रज में आंदोलन की पटकथा रची जा रही थी, उसी समय श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बनाने की डिजाइन तैयार की जा रही थी। यह डिजाइन राजस्थान के प्रभाकर सोमपुरा द्वारा तैयार किया गया।
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1983 में जब श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ तो उसी समय निश्चय किया गया था कि इसी प्रकार का भव्य मंदिर अयोध्या में प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान पर बनवाया जाएगा। नतीजतन, प्रभाकर सोमपुरा के पौत्र ने अपने दादा द्वारा बनाए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की स्थापत्य कला को बारीकी से देखने के बाद श्रीराम मंदिर के डिजाइन को अंतिम रूप दिया और उसी के आधार पर वहां भव्य मंदिर बन रहा है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के जनसंपर्क अधिकारी एवं अयोध्या आंदोलन के समय मथुरा में बजरंग दल के प्रथम जिला संयोजक रहे विजय बहादुर सिंह बताते हैं कि श्रीकृष्ण स्मारिका में श्रीकृष्ण मंदिर की बनावट का उल्लेख है। प्रभाकर सोमपुरा द्वारा इसकी डिजाइन नागर शैली में तैयार करने का उल्लेख है। नागर शैली उत्तर भारतीय हिंदू स्थापत्य कला की तीन प्रमुख शैलियों में से एक है। वास्तुशास्त्र के अनुसार नागर शैली के मंदिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च अंश तक चतुष्कोण होना बताया जाता है।
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नागर शैली की दो बड़ी विशेषताएं हैं, इसकी विशिष्ट योजना और विमान। इसकी मुख्य भूमि आयताकार होती है, जिसमें बीच के दोनों ओर क्रमिक विमान होते हैं जिनके चलते इसका पूर्ण आकार तिकोना हो जाता है। मंदिर के सबसे ऊपर शिखर होता है, जिसे रेखा शिखर भी कहते हैं। मंदिर में दो भवन भी होते हैं, एक गर्भगृह और दूसरा मंडप, मंडप श्रीकृष्ण जन्मभूमि में भागवत भवन के रूप में जाना जाता है। नागर शैली के अनुसार गर्भगृह ऊंचा होता है और मंडप छोटा होता है। गर्भगृह के ऊपर एक घंटाकार संरचना होती है,जिससे मंदिर की ऊंचाई बढ़ जाती है, जो कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पर साफ देखने को मिलती है। अयोध्या में बन रहा श्रीराम का भव्य मंदिर भी इसी आधार पर बनाया जा रहा है।

22 जनवरी को बांसुरी छोड़ धनुष बाण उठाएंगे श्रीकृष्ण
अयोध्या में रामलला की भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का जश्न 22 जनवरी को ब्रज के मंदिरों में भी जोर-शोर से मनाया जाएगा। इस दिन श्रीकृष्ण का शृंगार राम स्वरूप में किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर को तो पूरी तरह से अयोध्या के राम मंदिर की थीम पर ही सजाया जाएगा। इधर, वृंदावन के राधावल्लभ मंदिर में इसी प्रकार का कार्यक्रम होगा। ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन कमेटी बांके बिहारी को राम स्वरूप में सजाने पर मंथन कर रही है।

अन्य मंदिरों में तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। मंदिरों के साथ ही जिले के सरकारी भवनों, कार्यालयों, जिला कारागार को भी भव्य रूप से सजाया जाएगा जिले के थानों को भी सजाया जाएगा। सभी स्थानों पर 22 जनवरी की शाम दीप जलेंगे। शहर में भी कई स्थानों, चौराहों को सजाने की तैयारी चल रही है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद भी अपने भवन को सजाएगा। जिला कारागार में बंदियों/कैदियों को प्राण प्रतिष्ठा का लाइव कार्यक्रम दिखाया जाएगा।
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