वृंदावन। गुरु और शिष्य की प्राचीन परंपरा का रविवार को फिर से निर्वहन होगा। हजारों शिष्य गुरु वंदन करेंगे तो नए शिष्य भी इस दिन गुरु दीक्षा लेंगे। अगर तीर्थ नगरी वृंदावन की बात करें तो 500 से अधिक गुरुओं की गद्दी सज गई हैं। कई आश्रमों में तो गुरु पूजन भी शुरू हो गए हैं। रविवार को गुरु पूर्णिमा पर विभिन्न राज्यों से आने वाले हजारों भक्त अपने-अपने गुरुओं का पूजन-अर्चन करेंगे।
वृंदावन के ज्ञानगुदड़ी, अटल्ला चुंगी, परिक्रमा मार्ग, मोतीझील मार्ग, रमणरेती, वराह घाट, काली दह, सुदामा कुटी, परिक्रमा मार्ग स्थित टटिया स्थान आदि क्षेत्र में करीब छोटे-बड़े 500 से अधिक आश्रम हैं। 21 जुलाई को मनाए जाने वाले गुरु पूर्णिमा की आश्रमों के साथ-साथ मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से भारी तादाद में शिष्य गुरुओं के पूजन को यहां आएंगे। इसके लिए अभी से ही गेस्ट हाउस, होटल और धर्मशाला फुल हो गए हैं।
भारत वर्ष सनातनी है। सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा के दिन सभी श्रद्धालु गुरुजी का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस उत्सव को व्यास पूजन भी कहा जाता है। गुरु पूर्णिमा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की मंगल कामना करते हैं।
- नाभापीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्ण देवाचार्य महाराज
मनुष्य के जीवन में गुरु का होना जरूरी है। गुरु मनुष्य को संस्कारों से सींचते हुए संस्कारी बनाता है। जिससे मनुष्य का जीवन निरंतर विपदाओं से परे होते हुए नवीन ऊंचाइयों पर पहुंचता है। इसके लिए पुराणों से गुरु शिष्य की परंपरा चली आ रही है। इसका सनातन में आज तक निर्वहन किया जा रहा है।
- भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य, गोरी गोपाल आश्रम
ईश्वर गुरु रूप में मानव को भक्तिमार्ग पर चलते हुए सद्कार्यों की प्रेरणा देते हैं। गुरु गोविंद से मिलने का माध्यम हैं। गुरुमंत्र आध्यात्मिक यात्रा को बढ़ाते हुए भगवद् प्राप्ति का साधन है। सार्थक जीवन के लिए गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।
- देवकीनंदन ठाकुर महाराज, प्रियकांत जू मंदिर
सद्गुरु हमें सजगता की औषधि देते हैं। मन तो आपको कुपंथ पर ले जाने का प्रयत्न करेगा ही, लेकिन स्वयं आत्मानुशासनपूर्वक उसको सद्मार्ग पर लाना आपकी सजगता है।
- साध्वी ऋतंभरा दीदी मां, वात्सल्य ग्राम