वृंदावन। भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक पटल पर प्रतिस्थापित करने वाले संगीत सम्राट स्वामी हरिदास के अवतरण दिवस पर संगीत जगत की नामचीन हस्तियों ने कान्हा की नगरी में अपनी संगीत साधना से स्वामीजी को भावांजलि अर्पित की।
दो दिवसीय स्वामी हरिदास संगीत एवम नृत्य महोत्सव के पहले दिन हजारों संगीत प्रेमियों ने भारतीय संस्कृति का लुत्फ उठाया। शास्त्रीय संगीत के पुरोधा कहे जाने वाले महान संगीतज्ञ तानसेन और बैजू बावरा के गुरु स्वामी हरिदास ने अपनी अद्वितीय भक्ति से सम्राट अकबर को भी नतमस्तक कर दिया था।
जन-जन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को अपनी अप्रतिम संगीत साधना से प्रकट करने वाले स्वामी हरिदास ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाईयां दीं। इसकी कड़ी में ढाई दशक से परंपरागत विराट संगीत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस दो दिवसीय महोत्सव में प्रथम दिवस मंच पर नृत्य, गायन और वादन की विधाओं का साक्षात्कार हुआ। महोत्सव का विधिवत शुभारंभ ब्रज विभूषित संत
कार्षिण गुरुशरणानंद महाराज,
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौ. लक्ष्मीनारायण चौधरी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी संतोष सिंह, राजस्थान के विधायक जयदेव विहानी, पूर्व विधायक प्रदीप माथुर, वन महाराज कालेज के चेयरमैन नामदेव शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य दीप प्रज्जवलन के साथ किया।
कार्ष्णी गुरु शरणानंद
महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा स्वामी हरिदास संगीत और नृत्य महोत्सव का मंच स्वामीजी को सच्ची भावांजलि अर्पित करता है। एडीजी आगरा अनुपम कुलश्रेष्ठ ने कहा कि स्वामी हरिदास ऐसी विभूति थी जिन्होंने श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार को अपनी अलौकिक संगीत साधना से वशीभूत किया। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत स्वामी हरिदास अकादमी के निदेशक अजीत सिंह ने सहयोगी कलाकारों के साथ कथक नृत्य के जरिए भगवान श्रीराधाकृष्ण की लीला पर आधारित ठुमरी के साथ अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की।
समाज राग में यह प्रस्तुति सुन संगीत प्रेमी भाव विभोर हो गए। इसके बाद कलाकारों ने तीन ताल विलय एवं द्रुत में नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी। दो दिनों तक चलने इस संगीतमय उत्सव में देश के अलग अलग प्रांतों से हजारों संगीत प्रेमियों ने संगीत संध्या का पूर्ण आनंद लिया। समारोह में आईजी दीपक कुमार, एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय समेत अनेक लोग मौजूद रहे। संचालन शिखा द्विवेदी ने किया। आभार समिति सचिव गोपी गोस्वामी ने किया।