मथुरा। ब्रज की प्राचीन विरासतों को बचाने और उनका संरक्षण करने के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने अपना सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। मथुरा में 870 स्थल या विरासत ऐसी हैं, जिनमें पारंपरिक वास्तुकला दिखाई देती है। इनमें से 746 विरासतों को चिन्हित कर लिया गया है। पहले चरण में 17 विरासतों का सर्वे कर लिया गया है। इनमें जहां आवश्यकता होगी, वहां जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
जिले में मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल, गोवर्धन और सौंख में ऐसी विरासतों को तलाश किया गया है, जो पारंपरिक वास्तुकला के लिहाज से अद्वितीय और सांस्कृतिक महत्व की हैं। दरअसल पूरे जिले में पारंपरिक वास्तुकला वाले 870 विरासत स्थल ऐसे हैं, जिनका उल्लेख विभिन्न ग्रंथों में किया गया है।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ब्रज विकास योजना के तहत इनमें से 746 विरासतों को तलाशा गया। इन विरासतों में से कई विरासतें या तो उपेक्षा का शिकार हैं तो कहीं अनदेखी का शिकार हैं। ब्रज विकास योजना में इन सारी विरासतों को संरक्षण और जीर्णोद्धार कराया जाएगा। संरक्षण के लिए इनमें से पहले चरण में 17 विरासतों का सर्वे कर लिया गया है। इस विरासतों में जहां कहीं भी टूट-फूट होगी, वहां जीर्णोद्धार कराया जाएगा। लेकिन इस जीर्णोद्धार की खासियत यह होगी कि मरम्मत मूल संरचना के अनुसार ही होगी। यानि जीर्णोद्धार के बाद विरासत की संरचना में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
इन विरासतों का हुआ सर्वे
सर्वे की गई विरासतों में गोकुल में पोतरा कुंड, नंद द्वार, महावन में बगीची वाली छतरी, बरसाना में वृषभानु कुंड, जल महल और कांच महल, गोवर्धन में रणजीत सिंह छत्री, कुसुम सरोवर, गिरिराज बाग और कुंड, सुरकुटी और वल्लभ निकुंज शामिल हैं। दूसरी ओर वृंदावन में अष्टसखी मंदिर, जुगल किशोर मंदिर, राधा बावली और गोविंद देव मंदिर, मथुरा में जैन संग्रहालय और राजकीय संग्रहालय, नंदगांव में नंद मंदिर और सौंख का प्राचीन टीला शामिल हैं।
वर्जन-
प्राचीन 17 विरासतों का सर्वे कराया गया है। अब इनका संरक्षण और जीर्णोद्धार कराया जाएगा। संरक्षण या जीर्णोद्धार के दौरान किसी भी तरह से विरासत की वास्तुकला में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
- एसबी सिंह, सीईओ उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद