राहुल दक्षमथुरा। समाज कल्याण विभाग के भी अजब कारनामे हैं। जनपद में जिंदा लोग वृद्धावस्था पेंशन पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं और विभाग ने मृतकों को धनराशि बांट दी। विभागीय सत्यापन में इसका खुलासा हुआ है। अब अधिकारी मृतकों के खाते से पेंशन राशि रिकवर करने की तैयारी में लगे हैं। ऐसे 1249 मृतक हैं, जिनके खाते में पेंशन राशि जमा करवा दी गई है। जिले में 21 हजार से अधिक लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्हें कई स्तरों पर स्वीकृति नहीं मिलने के कारण पेंशन नहीं मिल पाई है।
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने सोमवार को समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की समीक्षा की। इसमें बड़ी संख्या में पेंशन आवेदनों के लंबित होने का मामला सामने आया। मंगलवार को अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि समाज कल्याण विभाग ने पेंशन की आखिरी किस्त मार्च 2023 में जारी की थी। यह किस्त 52830 लोगों के खाते में 500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से तीन माह की भेजी गई। इनमें 1249 ऐसे वृद्ध भी शामिल थे, जिनकी मौत हो चुकी है। इनमें 1051 ग्रामीण और 198 शहरी क्षेत्र के हैं। इनको पेंशन के रूप में दी गई धनराशि 18 लाख 73 हजार 500 रुपये है।
सत्यापन के नाम पर 7301 आवेदन दबाए बैठे हैं बीडीओ-एसडीएम
वृद्धावस्था पेंशन के लिए जिले के सभी ब्लाॅक और तहसीलों के स्तर पर सत्यापन के इंतजार में 7301 आवेदन लंबित हैं। ब्लॉक स्तर पर आवेदन के सत्यापन की जिम्मेदारी बीडीओ की होती है। इसके बाद आवेदन एसडीएम के पास जाता है। वहां से इन पर तहसील स्तरीय रिपोर्ट लगती है। दोनों ही स्तरों पर लापरवाही का नतीजा है कि वृद्धों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
1800 आवेदन सत्यापित, मंजूरी नहीं होने से लटके
समाज कल्याण विभाग के स्तर पर 1800 आवेदन लंबित हैं। इन सभी आवेदनों का सत्यापन बीडीओ और एसडीएम के स्तर पर हो चुका है। अब समाज कल्याण विभाग को इन्हें मंजूरी देकर लाभार्थी सूची में शामिल करना रह गया है। इसकी फाइल भी तैयार हो चुकी है। मगर, मंजूरी मिलने के इंतजार में आवेदन धूल फांक रहे हैं।
राशन और आधार कार्ड की फीडिंग के फेर में फंसी पेंशन
जिले के 10694 पेंशन लाभार्थियों का डाटा एनपीसीआई पोर्टल से जिला समाज कल्याण विभाग को आधार फीडिंग कराने के लिए मिला है। इस डाटा में से 1949 पेंशनर्स शहरी क्षेत्र तथा 8745 ग्रामीण क्षेत्र के हैं। विभाग के अनुसार आधार फीडिंग का काम खुद ही पेंशनर्स को बैंक जाकर कराना है, तभी उनको राशि का भुगतान होगा। वहीं, 10534 ऐसे पेंशनर्स हैं, जिनके वृद्धावस्था पेंशन आवेदन पत्र से उनके राशन कार्ड की फीडिंग नहीं हुई है या फिर उन्होंने अपना राशन कार्ड बनवाया ही नहीं है। ऐसे पेंशनर्स का भुगतान भी मुख्यालय द्वारा रोक दिया है। विभाग के अनुसार राशन कार्ड फीडिंग या राशन कार्ड बनवाने का काम भी खुद वृद्ध पेंशनर्स को ही करना है।
मार्च में आखिरी बार मिली थी पेंशन राशि
जिले के 52830 लाभार्थियों के खातों में वृद्धावस्था पेंशन की राशि का अंतिम भुगतान मार्च में विभाग किया गया था। इसके बाद तीन माह की राशि जुलाई के शुरुआत में भेजनी थी, लेकिन अगस्त माह का भी समापन होने को है। अभी तक राशि नहीं भेजी गई है। विभागीय अधिकारी सत्यापन के नाम पर रोक लगी होने की बात कहकर वृद्धों को टरका देते हैं।
साहब मेरे पिता कागजों में मार दिए, जबकि वे जिंदा हैं...
गोवर्धन इलाके के सपेरा नगला के रहने वाले बनवारी नाथ मंगलवार को समाज कल्याण विभाग कार्यालय पहुंचे। इनकी शिकायत थी कि उनके 100 वर्षीय पिता नेतानाथ जिंदा हैं। जबकि उन्हें सरकारी महकमे ने कागजों में मार दिया। किसी ने उनका मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवा दिया और उसके आधार पर पेंशन राशि से लेकर अन्य सुविधाएं बंद करा दी हैं। बनवारी नाथ बताते हैं कि उनके पिता की पेंशन दस माह से रुकी हुई है। वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते और अधिकारियों को यह बताते-बताते थक गए हैं कि उनके पिता जिंदा हैं। महज एक फर्जी कागज के टुकड़े के आधार पर उन्हें कैसे मरा मान लिया।
पत्नी सुखदेवी की पेंशन राशि के लिए एक साल पहले आवेदन किया था। अधिकारी चक्कर लगवा रहे हैं। कभी कोई कागज कम तो कभी कोई अन्य कमी बताकर टरका देते हैं।
- हाकिम सिंह निवासी बिरौना, बल्देव
गांव के तीन वृद्धों की पेंशन पांच माह से रोक रखी है। पेंशन पुनः चालू कराने के लिए कई बार विभाग के चक्कर काट चुका हूं।
- चौ. हरपाल, पूर्व प्रधान, भूढ़ा, बल्देव
समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजना की सोमवार को ही समीक्षा की गई है। इस दौरान लंबित आवेदनों का बिंदु सामने आया। संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी वृद्ध पेंशन के लिए परेशान न हो, जो दिक्कतें सामने आ रहीं हैं। उनका निस्तारण कर आवेदनों पेंशन राशि जारी की जाए।
- पुलकित खरे, डीएम