मथुरा। मथुरा में कुटीर उद्योग के तौर पर स्थापित हो चुके कृष्ण पोशाक एवं शृंगार के सामान के कारोबार को भी पंख लगने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार मथुरा में होगा। भारत समेत 40 से अधिक देशों से इसके लिए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड से भी कान्हा की ड्रेस की खूब डिमांड हो रही है।
इस बार 26 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। कान्हा के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। मथुरा में तो माहौल उत्सव जैसा हो गया है। कृष्ण पोशाकें सबसे ज्यादा बिक रही हैं। 5 रुपए से 50 हजार तक की कान्हा की पोशाक बाजार में उपलब्ध है। जन्माष्टमी पर कान्हा को मथुरा में ही बनी नई पोशाक पहनाने की सर्वाधिक डिमांड है। मथुरा-वृंदावन में करीब 20 हजार लोग कान्हा के कपड़े तैयार करने के कारोबार से जुड़े हुए हैं। पोशाक के थोक विक्रेता मनोज बंसल बताते हैं कि बूटी और रेशम स्टोन की पोशाक इस बार काफी डिमांड में है। हैंड वर्क की डिमांड धीरे-धीरे कम हो रही है। बूटी वर्क की ड्रेस का रेट कम होता है। इसलिए, इसकी डिमांड बढ़ी है। इसके अलावा, सूरत पोशाक जिसमें मशीन का वर्क है, उसकी भी डिमांड है। वह बताते हैं कि मथुरा में इस बार कान्हा की ड्रेस का करीब 200 से 250 करोड़ का व्यापार होगा। इस कारोबार से जुड़े लोग 12 से 14 घंटे तक काम इन दिनों कर रहे हैं। मुकुट और शृंगार सामग्री के विक्रेता कपिल बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में विदेशों में भी अब वृंदावन में तैयार होने वाली पोशाक और मुकुट के अलावा शृंगार सामग्री की डिमांड बढ़ी है। जन्माष्टमी के चलते बड़ी संख्या में ऑर्डर मिले हैं।
5 हजार के करीब परिवार कारोबार से जुड़े
मथुरा में करीब 700-800 दुकानें हैं, जो कान्हा की पोशाक बेचते हैं। 4 से 5 हजार परिवार इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। इनमें कारीगर, कच्चा सामान बेचने वाले और कारोबारी शामिल हैं। वैसे तो साल भर पोशाक तैयार की जाती है। मगर, जन्माष्टमी से 2 महीने पहले ज्यादा तेजी आ जाती है। इसका कारण बड़े पैमाने पर देश-विदेश से मिलने वाले ऑर्डर हैं।
अमेरिका से लेकर अरब तक से मिले ऑर्डर
जिला उद्योग उपायुक्त रामेंद्र कुमार ने बताया कि पोशाक की यूनिटों के संचालकों से वार्ता हुई है। कारोबारियों को इस वर्ष यूके, रूस, जापान, जर्मनी और मैक्सिको जैसे देशों से भी अच्छी संख्या में ऑर्डर आए हैं। अरब देशों में भी श्रीकृष्ण भक्त हैं। वहां भी मथुरा में बनी पोशाकों की सप्लाई हो रही है।