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Mathura News: श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ईदगाह की जमीन पर पहली बार किया दावा

Sat, 12 Aug 2023 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में पहली बार श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ईदगाह की जमीन पर दावा कर इसे हटाने के लिए शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में वाद दाखिल किया। इसमें दावा किया है कि 1968 में शाही ईदगाह मस्जिद के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने जो समझौता किया था, वह अधिकृत नहीं है और उसे खारिज किया जाए। भोजनावकाश के बाद कोर्ट ने इस पर सुनवाई की और दावा स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट भेजने को कहा है, ताकि इस प्रकरण में पहले से चल रही 17 दावों पर सुनवाई के साथ इसे समायोजित किया जा सके।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर वादी ठाकुर बालकृष्ण केशव देव ने दावा दाखिल किया है। अधिवक्ता महेश चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान (पूर्व में सेवा संघ) और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी को प्रतिवादी बनाया है। दावे में कहा गया है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के साथ जन्मभूमि को लेकर जो समझौता किया था, वह गैर आधिकारिक है और उसे खारिज किया जाए। जन्मभूमि पर ईदगाह अनधिकृत तौर पर बनी है और इसे हटवाया जाए। अधिवक्ता ने बताया कि पांच हजार वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब से यह भूमि कटरा केशवदेव के नाम से जानी जाती है। करीब 16 एकड़ इस भूमि को ब्रिटिश काल में नजूल की भूमि घोषित कर दिया गया था, जिसे नीलामी में वाराणसी के राजा पटनीमल ने खरीद लिया और एक ट्रस्ट बनाया। इस ट्रस्ट द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ बनाया गया।

मंदिर परिसर की देखरेख और सफाई का ही जिम्मा था
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ का काम सिर्फ मंदिर परिसर की देखरेख और साफ-सफाई की व्यवस्था करना था, लेकिन 1968 में गैर आधिकारिक तौर पर शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी से जन्मभूमि को लेकर समझौता कर लिया गया। इस समझौते के तहत 13.37 एकड़ में से 2.5 एकड़ भूमि ईदगाह कमेटी को दे दी गई। यह समझौता पूर्ण रूप से गलत है।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के नाम नहीं थी भूमि, समझौता कैसे किया
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद मामले में इससे पहले 17 वाद दायर हो चुके हैं, लेकिन यह पहला मामला है, जिसमें जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से ठाकुर बालकृष्ण केशव देव खुद वादी हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने 1968 में शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के साथ दस बिंदुओं पर बिना किसी अधिकार के समझौता किया था। 13.37 एकड़ भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम पर है। जब भूमि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के नाम पर थी ही नहीं तो उसके द्वारा समझौता कैसे किया जा सकता है।



यह भी रखीं गईं दलीलें
गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि ठाकुर बालकृष्ण केशव देव की ओर से न्यायालय में दलील रखी गई कि वर्तमान में ट्रस्ट की जमीन पर बनी ईदगाह मस्जिद के आस-पास बने मकान आदि का टैक्स जन्मभूमि ट्रस्ट जमा कर रहा है। राजस्व अभिलेख में सदैव से जन्मभूमि ट्रस्ट मालिक है। 137 साल से इस मामले में मुकदमे चले। एक भी आदेश ऐसा नहीं है, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को मालिक नहीं माना गया हो।


14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकीं निगाहें
इस प्रकरण में सबसे पहला दावा दाखिल करने वाले श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अब इस मामले में दाखिल दावों की संख्या 18 हो चुकी है। हाईकोर्ट द्वारा सभी मामलों की फाइलें अपने पास मंगवाने के आदेश के खिलाफ ईदगाह कमेटी सुप्रीम कोर्ट गई थी। मांग रखी थी कि सभी दावों की सुनवाई हाईकोर्ट में न कर मथुरा जिला न्यायालय में ही की जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से प्रकरण संबंधी सभी दस्तावेज मांगे हैं। 14 अगस्त को सुनवाई होगी। वहां से अदालत तय होने के बाद कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
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