वृंदावन। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण को लेकर चल रहे विरोध के बीच मंदिर के सेवायतों ने विधिक विकल्प की ओर कदम बढ़ाए हैं। सेवायत सुप्रीम कोर्ट जाने से पूर्व विधिक राय लेने के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं।
कुछ सेवायत मंदिर कॉरिडोर के विरोध में हैं। ऐसे में उनके पास विधिक विकल्प ही बचा है। वह विधिक राय लेकर आगामी रणनीति बनाने में लगे हैं। कई बड़े अधिवक्ताओं से उन्होंने संपर्क साधा है। अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी से भी सेवायत गोस्वामियों ने बात की है। सेवायतों का मानना है कि 17 जनवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई के बाद वह अपनी रणनीति बनाएंगे। इसके लिए वह दिल्ली के अधिवक्ताओं से भी विधिक राय ले रहे हैं।
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासंघ के ब्रजप्रांत अध्यक्ष अमित भारद्वाज ने कहा है कि बिना कॉरिडोर के निर्माण के वृंदावन के मूल स्वरूप को बचाया जा सकता है और भीड़ के दबाव को कम किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि सप्त देवालय सहित वृंदावन के अन्य मंदिरों की तरफ दर्शनार्थियों को आकर्षित करें और उन मंदिरों का प्रचार-प्रसार किया जाये। जब कोई विशिष्ट व्यक्ति वृंदावन में आये तो पहले अन्य मंदिरों में जाए ताकि दर्शनार्थियों को भी वहां जाने की उत्सुकता बढ़े। भीड़ को चारों ओर बांटने मात्र से ही समस्या का समाधान हो सकता है ।
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आज होगी बैठक
वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर के विरोध में व्यापारियों और स्थानीय लोगों की बुधवार को होने वाली बैठक किन्हीं कारणों से स्थगित कर दी गई। अब यह बैठक आज होगी। कॉरिडोर निर्माण के विरोध में वृंदावन बचाओ समिति की ओर से बुधवार की दोपहर मंदिर के सेवायत गोस्वामियों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी। मंगलवार को बैठक में वृंदावन बचाओ समिति का गठन किया गया था। समिति के एक व्यापारी के परिजन के निधन के बाद बैठक को निरस्त कर दिया गया। गोविंद खंडेलवाल ने बताया कि अब यह बैठक आज होगी। इसमें आगामी रणनीति बनाई जाएगी।