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Mathura News: सड़कों पर दौड़ रहे, पेंशन के लालच में कागजों में दिव्यांग

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मथुरा। हाथ-पैर सलामत होने के बाद भी जिले के 170 लोग कागजों में दिव्यांग बन गए और एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन का लाभ भी लिया। दिव्यांगजन कल्याण विभाग की ओर से जब सर्वे कराया गया तो इनकी पोल खुल गई। इसी प्रकार सर्वे में 92 ऐसे लाभार्थियों के नाम सामने आए, जो मृत हो चुके हैं, लेकिन उनके परिवार वाले विभाग से यह जानकारी छिपाकर पेंशन राशि हड़पते रहे।
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दिव्यांगजन कल्याण विभाग की ओर से दिशा की बैठक में सांसद हेमा मालिनी के समक्ष सर्वे का यह डाटा पेश किया था। महज एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के लिए इस प्रकार की करतूत देख सांसद व अन्य अधिकारी भी सकते में आ गए। सभी 170 अपात्रों और 92 मृतकों के परिजनों से पेंशन राशि वसूलने का आदेश दिया गया है।

इनको माना जाता है पात्र
दिव्यांग पेंशन योजना के तहत 4 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता से ग्रस्त, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले निराश्रित दिव्यांगों को 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। आवेदन के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, तहसील द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र, बैंक खाता, दिव्यांगता दर्शाता हुए फोटो की आवश्यकता होती है।
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मिलीभगत के कारण सरकारी पैसे का गबन



सर्वे में अपात्र पाए गए 170 लोगों को विभाग ने पेंशन योजना से बेशक वंचित कर दिया है, लेकिन सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर इन लोगों को पहले योजना में शामिल ही कैसे कर लिया गया। स्वास्थ्य विभाग पर इनके फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं दिव्यांगजन कल्याण विभाग पर भी आवेदकों के भौतिक सत्यापन में मिलीभगत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।


कोई भी अपात्र सरकार की किसी भी योजना का लाभ न ले पाए, इसके लिए सभी विभागों को लाभार्थियों के सत्यापन के आदेश दिए हैं, जो लोग सरकारी पैसे को जालसाजी कर हड़प रहे हैं, उनसे वसूली होगी।
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- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम

एक नजर आंकड़ों पर

12680 दिव्यांग हैं पेंशन योजना में पंजीकृत
12680000 रुपये प्रतिमाह दिव्यांगों के खाते में भेजता है विभाग
92 पेंशन लाभार्थी सर्वे में पाए गए मृत
170 पेंशन लाभार्थी सर्वे में पाए गए अपात्र
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