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उत्तराखंड में सख्त कानून से धर्मांतरण के मामलों में कमी : धामी

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वृंदावन। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में बढ़ रहे धर्मांतरण के मामलों को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कानून बनाया, जिससे इस तरह के मामलों में कमी आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य के सभी धार्मिक स्थलों के विकास के लिए सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। इसी का परिणाम है कि लाखों श्रद्धालु सुगम रास्तों से धार्मिक स्थलों पर सुरक्षित पहुंच रहे हैं।
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धामी शनिवार को वात्सल्य ग्राम में साध्वी ऋतंभरा के भौतिक जीवन के 60 साल पूरे होने पर षष्ठी पूर्ति महोत्सव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि देव भूमि में विकास उसके मूल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए कराया जा रहा है। पांच हजार जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन रह है। यह सभी के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद लेकर राम को स्वयं में धारण करें। राम जन्मभूमि आंदोलन के समय साध्वी ऋतंभरा के क्रांतिकारी विचार सुनकर दिल उत्साह से भर जाया करता था। आज अयोध्या में जिस भव्यता के साथ राम मंदिर आकार ले रहा है, उसमें साध्वी का बड़ा योगदान है।

सांसद हेमामालिनी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की पावन भूमि में संतों के सानिध्य में सांसद बनकर रहने के साथ ही उन्हें ब्रजवासियों की सेवा का अवसर मिला है।साध्वी ऋतंभरा ने आध्यात्मिक होने के साथ ही सामाजिक प्रकल्पों को बल दिया और वात्सल्य ग्राम के रूप में अनूठा केंद्र बनाया है। राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने 1988-89 में साध्वी ऋतंभरा के हिंदू जागरण को देखा था जब श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के तहत उन्होंने देशभर में हिंदू समाज को एकजुट किया। वह विहिप की 4 अप्रैल 1991 को दिल्ली के बोट क्लब में आयोजित रैली के साक्षी हैं, जिसे साध्वी ऋतंभरा ने 10 लाख लोगों को जागृत करने का कार्य किया था। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में इनका बड़ा योगदान है। वर्ष 1992 में अयोध्या में विवादित हिस्से का टूटना एक संयोग था, जिसके बाद धीरे-धीरे देश से गरीबी का ढांचा भी टूटा। आज जब राम मंदिर बन रहा है तब भारत एक विश्वशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। साध्वी की षष्ठी पूर्ति भारत की आजादी के अमृतकाल में होना भी एक सुखद संयोग है।
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राम जन्मभूमि के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरि देव ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच साध्वी ऋतंभरा का शाल, श्रीफल, पुष्पहारों से स्वागत कर उन्हें राम मंदिर अयोध्या का मॉडल भेंट किया। इससे पूर्व साध्वी ऋतंभरा के गुरु स्वामी परमानन्द महाराज ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का आगाज किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन में साध्वी ऋतंभरा की बहुत बड़ी भूमिका रही। अभी और कार्य भी करने हैं। हम चाहते हैं कि वे थके नहीं और आगे भी हिंदू समाज के अन्य मंदिरों की मुक्ति के लिए अपनी तेजस्वी वाणी से समाज का नेतृत्व करें। महोत्सव में संयोजिका साध्वी सत्यप्रिया साध्वी स्वरूप गिरि, साध्वी समन्विता, साध्वी सुहृदया गिरि, स्वामी सत्यशील, स्वामी सत्यश्रवा, स्वामी सत्यश्रेय, साध्वी सत्यकीर्ति, साध्वी सत्यश्रुति, साध्वी साध्या, साध्वी सत्यनिधि और साध्वी सत्यश्रद्धा और उमाशंकर राही आदि मौजूद रहे।

इन्होंने किया संबोधित
आयोजन के पहले दिन स्वामी गोविंद गिरी देव, स्वामी शांति स्वरूपानंद, स्वामी बालकानंद, स्वामी ज्योतिर्मयानंद, स्वामी डॉ. रामकमलदास वेदांती, स्वामी विशोकानन्द, साध्वी प्राची, साध्वी साक्षी चेतना, साध्वी सिंधु चेतना, स्वामी शाश्वतानंद, साध्वी प्राची, विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार, महंत सुतीक्षण और हरिबोल बाबा महाराज ने विचार व्यक्त किए।


संघर्ष से नहीं न्यायालय से मिलेगा मथुरा व काशी में मंदिर निर्माण का मार्ग

वृंदावन। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि रामजन्म भूमि के बाद अब काशी और मथुरा का मामला न्यायालय में है। पूरा विश्वास है कि दोनों मुकदमे जीतेंगे। इसमें समय लग सकता है, लेकिन जीत हमारी होगी। वे शनिवार को वात्सल्य ग्राम में साध्वी ऋतंभरा के षष्ठी पूर्ति महोत्सव में शिरकत करने आए थे।

उन्होंने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि जैसे आज पूरे देशवासियों को 22 जनवरी पर अयोध्या बुला रहे हैं, वैसा मौका मथुरा और काशी के लिए भी आएगा। जिस तरह राम जन्मभूमि के लिए हिंदुओं को सैकड़ों वर्ष संघर्ष करना पड़ा, अब उस तरह के संघर्ष की आवश्यकता नहीं है। श्रीकृष्ण जन्म भूमि ईदगाह मामले में हाईकोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सहमति जताई है। अब देर नहीं लग रही। जन्मभूमि से जुड़े सभी केस हाईकोर्ट में चलेंगे। अब पुराने वाला समय नहीं रहा। कोर्ट के निर्णय को हिंदू और मुसलमान सभी स्वीकार करते हैं। अयोध्या में निमंत्रण को लेकर हो रही राजनीति पर कहा कि इसमें जो बड़े राजनीतिक दल हैं उनके अध्यक्षों को आमंत्रित किया है। कांग्रेस संसदीय बोर्ड की चेयरमैन सोनिया गांधी और विपक्ष के नेता अधीर रंजन को भीबुलाया है। शरद पवार उन लोगों की सूची में हैं, जिन्हें बुलाना तय किया है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि साध्वी ऋतंभरा ने वात्सल्य ग्राम बनाकर बालिकाओं के जीवन को संवारने और उन्हें वात्सल्य देने का अनूठा काम किया है।


अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मारेगा कहने वाले निमंत्रण की बांट जोह रहे हैंवृंदावन। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि संसद पर हमले से ज्यादा दुखद बात यह है कि हमलावरों के बारे में यह कहा जा रहा है कि वे बेरोजगार युवक थे। वात्सल्य ग्राम में शनिवार को साध्वी ऋंतभरा के षष्ठी पूर्ति माहोत्सव में आए त्रिवेदी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि देश की सुरक्षा पर इस तरह की राजनीति पहली बार नहीं की जा रह है। ऐसा पहले भी हुुआ है।


उन्होंने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में विरोधी दलों के नेताओं को लेकर आ रहे बयान पर कहा कि जो लोग कहते थे कि अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मारेगा, वे आज निमंत्रण की बांट जोह रहे हैं। इतना बड़ा परिवर्तन भगवान राम की कृपा से आया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर विरोधी यदि आज भी मन से भगवान के मंदिर में आना चाहे तो आएं। त्रिवेदी ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि और ज्ञानवापी मामला न्यायालय में विचाराधीन हैं और हमें पूर्ण विश्वास है कि न्यायिक प्रक्रिया के द्वारा साक्ष्य और तथ्य सच को उजागर करेेंगे और यहां भी मंदिर का भव्य निर्माण होगा।

उन्होंने राहुल गांधी की यात्रा को लेकर कटाक्ष भरा शेर सुनाया कि कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला, पर इन डूबने वालों का जज्बा भी नहीं बदला। इसलिए वह मंजिल न पाते हुए भी उसी रास्ते पर चलते रहेंगे। त्रिवेदी ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि जब पहले संसद पर हमला हुआ था तो अफजल को हालात का मारा कहने वाले तत्कालीन कांग्रेस सरकार मेें कैबिनेट मंत्री थे, जिनके रिटिन ट्वीट हैंं। याकुब मेनन की ज्यूडिशियली किलिंग करार दे रहे थे। जिन लोगोें ने संसद हमले में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे और उनके परिजनों ने मैडल लौटा दिए, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के सात साल बाद भी दोषियों को फांसी नहीं हुई थी।
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