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Mathura News: कबूतर वन विभाग के संरक्षण में, तस्कर भेजे गए जेल

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मथुरा। गोल्डन टेंपल मेल से बरामद हुए 42 कबूतरों को सोमवार को जीआरपी टीम ने वन विभाग के सुपुर्द कर दिया। वहीं गिरफ्तार दोनों तस्करों को केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया। अब जीआरपी दोनों तस्करों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही है।
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थानाध्यक्ष जीआरपी संदीप तोमर ने बताया कि बरामद कबूतरों को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। न्यायालय का आदेश होने तक कबूतर वन विभाग के संरक्षण में रहेंगे। आदेश मिलते ही कबूतरों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

जांच में सामने आया है कि दोनों कोच अटेंडेंट कबूतर तस्करी कर अच्छी खासी कमाई कर रहे थे। सुनील लोधी के संपर्क लुधियाना के कबूतर तस्करों से हैं। एक कबूतर की तस्करी के बदले में सुनील को 100 रुपये से अधिक मिलते थे। 42 कबूतरों की तस्करी के लिए 5 हजार में सौदा हुआ था। आरोपी सुनील और अनुराग चौहान का आधा-आधा हिस्सा था।
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सूत्रों के मुताबिक दोनों को 20 कबूतरों की खेप मथुरा में देनी थी। अन्य कबूतरों को रतलाम और बड़ोदरा ले जाना था। इसके पहले ही आरपीएफ और जीआरपी की टीमों ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

सूत्राें के अनुसार, एसी कोच में आरपीएफ ने शराब तस्करी की सूचना पर छापा मारा था। हालांकि कार्टन के अंदर से कबूतर बरामद हुए। चर्चा यह भी है कि सुनील पूर्व में भी कबूतर की तस्करी कर चुका है।



वर्ष 2022 में भी पकड़ी गई थी कबूतर की तस्करी

कबूतरों की तस्करी का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी वर्ष 2022 में जंक्शन जीआरपी ने एक कबूतर तस्कर बलिया निवासी धर्मेंद्र कुमार यादव को गिरफ्तार किया था। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने 46 प्रतिबंधित नस्ल के कबूतर बरामद हुए थे।



शौकीनों के बीच काफी महंगा बिकता है सफेद कबूतर

कबूतर पालने वाले शौकीनों को सफेद कबूतर बेहद पसंद आता है। जानकार बताते हैं कि सफेद कबूतर खरीदने के लिए शौकीन अच्छी खासी कीमत अदा करने को तैयार रहते हैं। सफेद कबूतरों को शांति का प्रतीक माना जाता है। कहा यह भी जाता है कि जिस घर में सफेद कबूतर रहते हैं। वहां माता महालक्ष्मी का वास होता है।
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