पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल ज्ञान सिंह, कांस्टेबल विवेकानंद और दिलीप मंगलवार सुबह अनिल उर्फ टिंकल निवासी भिडूकी, होडल, पलवल (हरियाणा) को जिला कारागार मथुरा से पलवल कोर्ट में पेशी पर लेकर गए थे। लौटते वक्त होडल तक टेंपो में आए। होडल में पुलिसकर्मियों ने अनिल को उसकी पत्नी से होटल में मिलने की अनुमति दे दी। होटल के कमरे में करीब एक घंटा रुकने के बाद अनिल पुलिस के सामने ही अपनी पत्नी के साथ स्कूटी पर बैठकर फरार हो गया।
इस मामले में तीनों पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। उधर, पलवल पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं। वहीं, एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी बैठा दी है। एएसपी आईपीएस कुंवर आकाश सिंह इस मामले की जांच कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को आरआई राधेश्याम द्वारा तीनों के खिलाफ रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को सौंपी गई।
बंदी का सुराग मिलने की चर्चा
अनिल उ की तलाश में पलवल और मथुरा जिले की पुलिस की भी कई टीमें लगी हैं। चर्चा है कि पलवल पुलिस ने उसका सुराग लगा लिया है। उसे शुक्रवार तक गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मेहमानों की सेवा, बंदियों को मिल रहा भागने का मौका
बंदी/कैदी को जेल से पेशी पर ले जाने के लिए बंदी वाहन अनिवार्य है, लेकिन मथुरा पुलिस वीवीआईपी, वीआईपी की फ्लीट में वाहनों के लगे होने के कारण बंदियों/कैदियों की अभिरक्षा में लापरवाही बरत रही है। अनिल उर्फ टिंकल के प्रकरण में भी सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर उसे गैरप्रदेश में बंदी वाहन से क्यों नहीं भेजा गया।
बंदी अनिल के फरार होने का मामला जोर पकड़ रहा है। इसके बाद भी पुलिसकर्मियों की लापरवाही में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। बृहस्पतिवार को कई बंदियों को जेल से कचहरी में पेशी पर लाया गया। बंदी पुलिस अभिरक्षा में वैन से उतरकर जब कचहरी के भीतर जा रहे थे तो उनके परिचित खुलेआम बातचीत में मशगूल थे। मगर, पुलिस उन्हें रोकटोक नहीं रही थी। आरआई राधेश्याम ने बताया कि बंदियों के परिवहन के संबंध में एसओपी निर्धारित है। उसका पालन हर हाल में अनिवार्य है। यह सही है कि बंदी को बंदी वाहन से ही ले जाना चाहिए। मगर, सरकारी वाहन वीवीआईपी ड्यूटी में भी भेजना अनिवार्य हैं।