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पेशी पर आए शातिर की चाल: पत्नी से मिलना है, कुछ देर के लिए होटल चलो...फिर ऐसे हुआ फरार देखते रह गए पुलिसवाले

Fri, 19 Jan 2024 03:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

पेशी पर आए शातिर अपराधी के जाल में पुलिसकर्मी फंस गए। पुलिसकर्मियों ने अपराधी को उसकी पत्नी से होटल में मिलने की अनुमति दे दी। होटल के कमरे में करीब एक घंटा रुकने के बाद वो पुलिस के सामने ही अपनी पत्नी के साथ स्कूटी पर बैठकर फरार हो गया। 
 
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मथुरा पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पलवल सेशन कोर्ट में पेशी के बाद होडल में पुलिस को चकमा देकर पत्नी संग फरार शातिर अपराधी अनिल उर्फ टिंकल का सुराग नहीं लगा है। इधर, बृहस्पतिवार को होडल पुलिस ने मथुरा पुलिस द्वारा तीन पुलिसकर्मियों पर दर्ज कराए मुकदमे में आरोपियों को नोटिस तामील कराया। होडल पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 41ए का नोटिस तामील कराते हुए उन्हें सशर्त छोड़ दिया। तय शर्तों के मुताबिक तीनों को पुलिस पूछताछ में सहयोग करना होगा। बिना जानकारी दिए वह जिला नहीं छोड़ सकेंगे।

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पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल ज्ञान सिंह, कांस्टेबल विवेकानंद और दिलीप मंगलवार सुबह अनिल उर्फ टिंकल निवासी भिडूकी, होडल, पलवल (हरियाणा) को जिला कारागार मथुरा से पलवल कोर्ट में पेशी पर लेकर गए थे। लौटते वक्त होडल तक टेंपो में आए। होडल में पुलिसकर्मियों ने अनिल को उसकी पत्नी से होटल में मिलने की अनुमति दे दी। होटल के कमरे में करीब एक घंटा रुकने के बाद अनिल पुलिस के सामने ही अपनी पत्नी के साथ स्कूटी पर बैठकर फरार हो गया।

इस मामले में तीनों पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। उधर, पलवल पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं। वहीं, एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी बैठा दी है। एएसपी आईपीएस कुंवर आकाश सिंह इस मामले की जांच कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को आरआई राधेश्याम द्वारा तीनों के खिलाफ रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को सौंपी गई।

बंदी का सुराग मिलने की चर्चा
अनिल उ की तलाश में पलवल और मथुरा जिले की पुलिस की भी कई टीमें लगी हैं। चर्चा है कि पलवल पुलिस ने उसका सुराग लगा लिया है। उसे शुक्रवार तक गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मेहमानों की सेवा, बंदियों को मिल रहा भागने का मौका
बंदी/कैदी को जेल से पेशी पर ले जाने के लिए बंदी वाहन अनिवार्य है, लेकिन मथुरा पुलिस वीवीआईपी, वीआईपी की फ्लीट में वाहनों के लगे होने के कारण बंदियों/कैदियों की अभिरक्षा में लापरवाही बरत रही है। अनिल उर्फ टिंकल के प्रकरण में भी सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर उसे गैरप्रदेश में बंदी वाहन से क्यों नहीं भेजा गया।

बंदी अनिल के फरार होने का मामला जोर पकड़ रहा है। इसके बाद भी पुलिसकर्मियों की लापरवाही में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। बृहस्पतिवार को कई बंदियों को जेल से कचहरी में पेशी पर लाया गया। बंदी पुलिस अभिरक्षा में वैन से उतरकर जब कचहरी के भीतर जा रहे थे तो उनके परिचित खुलेआम बातचीत में मशगूल थे। मगर, पुलिस उन्हें रोकटोक नहीं रही थी। आरआई  राधेश्याम ने बताया कि बंदियों के परिवहन के संबंध में एसओपी निर्धारित है। उसका पालन हर हाल में अनिवार्य है। यह सही है कि बंदी को बंदी वाहन से ही ले जाना चाहिए। मगर, सरकारी वाहन वीवीआईपी ड्यूटी में भी भेजना अनिवार्य हैं।
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बंदी परिवहन की यह है नियमावली
- बंदी को कड़ी सुरक्षा के साथ ही जेल से न्यायालय तक आगमन/प्रस्तुतीकरण अवधि में उनके सहयोगी/संबंधितों एवं अवांछनीय तत्वों का संपर्क अपराधी से न होने पाए।
- यात्रा के दौरान किसी भी नशीली वस्तु का सेवन पुलिस व बंदी नहीं करेगा।
- बंदी किसी भी दशा में उनके परिजनों/मित्रों द्वारा दिए गए प्राइवेट वाहन में यात्रा नहीं करेगा। साथ ही उनकी रिश्तेदारी एवं अन्य किसी स्थान पर लेकर नहीं जाएंगे।
- पेशी के लिए जाने वाले बंदियों को न्यायालय के अतिरिक्त अन्य किसी स्थान होटल, अस्पताल, गेस्ट हाऊस पर नही ले जाएंगे।
- बंदियों द्वारा उपलब्ध कराए गए खाद्य पदार्थ/पेय पदार्थ/रुकने के स्थान/वाहन आदि सुविधाओं का उपभोग पुलिस नहीं करेगी।
- बंदियों को एक जिले से दूसरे जनपद/राज्य ले जाने की दशा में रात्रि विश्राम की आवश्यकता हो तो संबंधित जिले की जेल में नियमानुसार दाखिल किया जाएगा।
- शातिर किस्म के बंदियों के मामले में विशेष सतर्कता बरतनी होगी।
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