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Mathura News: 500 साल पहले वृंदावन आए थे सिखों के प्रथम गुरु नानक देव

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गांधी नगर स्थित टीले पर गुरु नानक देव ने दिया था मानवता का संदेश
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गुरु नानक देव 4 उदासीन यात्रा में से पहली यात्रा में आए थे वृंदावन
संवाद न्यूज एजेंसी

वृंदावन। सिख धर्म के प्रथम गुरु नानक देव धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए करीब 500 साल पहले वृंदावन आए। वह यहां गांधी नगर स्थित प्राचीन टीले पर ठहरे और और लोगों को भक्ति करते हुए सच्चा जीवन जीने का मार्ग दिखाया। तभी से इस पावन स्थल का नाम गुरुनानक टीला पड़ गया। वर्तमान में यहां भव्य गुरुद्वारा बना है। यहां अरदास के लिए सुदूर क्षेत्रों से सिख धर्म के अनुयायी आते हैं।

गुरु नानक टीला गुरुद्वारा के प्रभारी परमजीत सिंह ने बताया कि गुरुनानकजी सन् 1513 में अगस्त माह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन वृंदावन आए थे। गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन में चार उदासीन (यात्रा) की थीं, इसमें से वह पहली यात्रा में वृंदावन आए थे। उनके साथ भक्त बाला और मरदाना भी साथ आए। टीले पर वह कुछ दिन ठहरे। इस दौरान वह संगत को परमेश्वर से जोड़कर मानवता का संदेश देते थे। यहां से उन्होंने जग को संदेश दिया कि परमेश्वर की भक्ति करते हुए सच्चा जीवन जीना चाहिए। वह इससे पहले मथुरा मसानी स्थित एक बगीची पर भी करीब एक माह से अधिक समय तक ठहरे। तभी से मसानी स्थित बगीची का नाम गुरुनानक बगीची पड़ गया।
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यह भी बताया जाता है कि 18 जून 1707 ईसवीं सिख फौज की मदद से मुगल बादशाह बहादुर शाह की जीत हुई तो उसने सिख धर्म के 10वें गुरु गोविंंद सिंह को धन्यवाद देने के लिए आगरा आने का निमंत्रण दिया था। बादशाह के निमंत्रण पर जब दिल्ली से आगरा के लिए गुरु गोविंद सिंह चले तो जुलाई 1707 को वह वृंदावन के इस पावन स्थान भी आए थे। इसका उल्लेख उनके दरबारी कवि सेनापति ने अपनी रचित पुस्तक श्रीगुरु शोभा में सन 1711 में में किया। वृंदावन के पावन स्थल गुरुनानक टीला पर भक्तों द्वारा 20 सितंबर 2015 में भव्य गुरुद्वारा बनकर तैयार हुआ। वर्तमान में इस गुरुद्वारा में धर्म प्रचार कमेटी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर साहिब के द्वारा संचालित किया जा रहा है।





गुरुनानक टीला गुरुद्वारा में आज मनेगा गुरुनानक देव का प्रकाश पर्व

सिख धर्म के प्रथम गुरु नानक देव का प्रकाश पर्व वृंदावन के गुरुनानक टीला गुरुद्वारा में सोमवार को विभिन्न धार्मिक आयोजनों के बीच मनाया जाएगा। गुरुद्वारा के प्रभारी परमजीत सिंह ने बताया कि 25 नवंबर से अखंड पाठ साहब चल रहा है, जोकि सोमवार को सुबह 10 बजे संपन्न होगा। इसके बाद गुरमति समागम का आयोजन होगा, जिसमें शबद कीर्तन, गुरुमत विचार, अरदास और उसके बाद अटूट लंगर का आयोजन होगा।




मथुरा में गुरु नानक देव ने किया था 40 दिन का प्रवास
गुरुनानक बगीची प्रबंध समिति के अध्यक्ष गुरुबचन सिंह ने बताया कि अगस्त 1512 में अपनी दूसरी उदासीन यात्रा के दौरान गुरु नानक देव मथुरा आए थे। उन्होंने यमुना किनारे गऊघाट पर प्रवास किया। यमुना में बाढ़ आने पर उन्होंने मसानी स्थित बगीची पर करीब 40 दिन से अधिक प्रवास किया। प्रवास के दौरान उन्होंने लोगों को शांति, सद्भाव और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संदेश दिया था। बाद में इसी स्थान को गुरुद्वारा का रूप दिया गया। गुरूबचन सिंह कहते हैं कि प्रवास के एक दिन बगीची पर संगत मौजूद थी। इसी बीच उन्हें किसी ने कुएं के खारे पानी के बारे में बताया। इस पर गुरु नानक देव ने करतार भली करेंगे कहते हुए मरदाना को कुएं का पानी निकालकर सबको बांटने को कहा। पानी बांटा गया तो वह मीठा था। तभी से कुएं का मीठा पानी सबके लिए प्रसाद बन गया।
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आज होगा अखंड पाठ साहिब का आयोजन
मुख्य ग्रंथी प्रसादी सिंह ने बताया कि गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर सुबह 10 बजे से अखंड पाठ साहिब, 11 से 12 बजे तक कथा और 12.30 से 2 बजे तक शबद कीर्तन के आयोजन होंगे। इसके बाद लंगर का आयोजन होगा।
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