सात कोस की परिक्रमा करके लौटे श्रद्धालु
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किसी ने परिवार की शांति मांगी तो किसी ने अपनों की सेहत। कोई पुत्र की कामना लेकर गिरिराज के चरणों में पहुंचा तो किसी को नौकरी चाहिए थी। सबकी अपनी-अपनी मन्नत थीं। गिरिराज के भक्तों का उन पर अटूट विश्वास है। सभी को आस है उनकी मुराद जरूर पूरी होगी। इसी उम्मीद और कामना को लेकर सात कोस की परिक्रमा पूरी की और गिरिराज से फिर आने का वादा करके गोवर्धन से लाखों भक्त अपने घरों को रवाना हो गए। गोवर्धन में देवशयनी एकादशी से मुड़िया पूर्णिमा मेला की शुरूआत हुई थी। 15, 16 और 17 जुलाई को तो भक्तों की भीड़ पिछले वर्षों के मुकाबले कम ही थी लेकिन 18 जुलाई से भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा। इस बार मेले के दौरान लगातार बरसात होती रही लेकिन परिक्रमा लगाने पहुंचे भक्तों की आस्था के आगे इंद्रदेव का भी जोर चल नहीं पाया। पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर तो देर रात तक लोगों के गोवर्धन पहुंचने का सिलसिला जारी था। रोडवेज बसों में छतों पर बैठकर लोग सफर कर रहे थे। पूर्णिमा पर तो तड़के से ही परिक्रमा मार्ग पर लाखों की भीड़ पहुंच गई। लोगों ने भगवान कृष्ण, गिरिराज और राधा रानी के जयकारों के साथ परिक्रमा शुरू की। परिक्रमा मार्ग पर गूंज रहे भजन माहौल को कृष्णमय बनाए हुए थे। सात कोस की परिक्रमा पूरी करने के बाद दोपहर से भक्तों के लौटने का सिलसिला शुरू हो गया था। दिल्ली के सुधीर कुमार ने बताया कि वह फिर आएंगे। बाबा से कहा है कि वह अपनी कृपा बनाए रखें, वह परिवार के साथ आते रहेंगे। गाजियाबाद में कविनगर निवासी नेहा अपने पति प्रदीप के साथ पहुंची थीं। बोलीं, बाबा बहुत दयालु हैं। उन्हें विश्वास है कि जो मांगा है पूरा होगा। बाबा से विदा लेकर वापस अपने घर जा रहे हैं। फरीदाबाद के मोहित अपनी पत्नी के साथ परिक्रमा लगाने आए थे। सुबह सात बजे परिक्रमा पूरी कर ली थी। बोले, बाबा से अनुमति ले ली है। अब अपने घर जा रहे हैं। गिरिराज जी जब भी बुलाएंगे वह दौड़े चले आएंगे। जयपुर से विवेक गुप्ता अपने पिता के साथ आए थे। विवेक ने बताया कि उनकी तो यह तीसरी परिक्रमा थी। पापा पहली दफा आए हैं। विवेक का कहना है कि गिरिराज महाराज अगर किसी को बुलाते हैं तो वह घर पर रुक नहीं सकता। सारे बंधन तोड़कर उनकी शरण में आ जाता है। बरेली से बिट्टू, मेरठ के नयनपाल और कानपुर के दुष्यंत पहले भी परिक्रमा लगा चुके हैं। उनका कहना है कि बाबा से जो भी मांगा है वह मिला है।