- बांकेबिहारी समेत अन्य मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत बन गए हैं बंदर
- स्थानीय युवा 50 से सौ रुपये लेकर और बंदरों को फ्रूटी देकर वापस दिला रहे टोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
वृंदावन (मथुरा)। वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर व अन्य क्षेत्रों में बंदर अब चश्मा, मोबाइल फोन व पर्स की बजाय श्रद्धालुओं की टोपी, मफलर ले जा रहे हैं। वहीं स्थानीय युवक बंदरों से टोपी और मफलर छुड़ाने के एवज में सुविधा शुल्क लेकर बंदरों को फ्रूटी देकर सामान वापस करा रहे हैं। ये बंदर श्रद्धालुओं के कौतूहल का विषय बने हुए हैं।
ठंड में वृंदावन के बंदरों ने श्रद्धालुओं से फ्रूटी और खाने-पीने की वस्तुएं पाने के लिए नया तरीका अपना रहे हैं। चेहरे से चश्मा, हाथ से फोन और पर्स ले जाने में माहिर बंदरों से श्रद्धालुओं ने सतर्कता बरतनी शुरू की तो अब वे टोपी, मफलर ले जाने लगे हैं। सर्दी के समय टोपा, मफलर ले जाने से श्रद्धालु परेशान हो रहे हैं। बंदरों द्वारा टोपा ले जाने पर छुड़ाने काे स्थानीय युवकों ने आमदनी का साधन बना लिया है। वह उत्पाती बंदरों को फ्रूटी देकर टोपा, मफलर छुड़ा रहे हैं। इसके एवज में वे श्रद्धालुओं से 50 से सौ रुपये तक ले रहे हैं।
किशोरपुरा निवासी रोहित कुमार, संत कॉलोनी निवासी सोनू, मयंक ने बताया कि विद्यापीठ चौराहा पर बांकेबिहारी मंदिर को जाने के लिए रेलिंग लगी है। रेलिंग में श्रद्धालु सर्दी में टोपी, मफलर आदि पहनकर लाइन में खड़े रहते हैं। इसी बीच बंदर उनके सिर पर से टोपी आदि ले जाते हैं। पूरे दिन में इस तरह 300 से ज्यादा श्रद्धालु एक ही स्थान से बंदरों के शिकार होते हैं। फ्रूटी देकर श्रद्धालुओं का सामान बंदरों से वे लौटा देते हैं। इसके बदले में श्रद्धालु जो दे जाते हैं वह रख लेते हैंं।
इन स्थानों पर बंदरों का सर्वाधिक उत्पात
हरिनिकुंज चौराहा, विद्यापीठ चौराहा, गौतमपाड़ा तिराहा, पक्का चबूतरा, बांकेबिहारी पुलिस चौकी, बांकेबिहारी मंदिर का चबूतरा, वीआईपी रोेड, जादौन पार्किंग, जुगलघाट तिराहा, वनखंडी तिराहा, राधादामोदर मंदिर के सामने, शाहजी मंदिर के सामने, निधिवन मार्ग, राधारमण मदिर तिराहा, चीरघाट आदि क्षेत्रोंं पर श्रद्धालु बंदरों के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं।