गुरुवार सुबह आठ बजे आश्रम के पदाधिकारी सुधीर शुक्ला के पास फोन आया तो वह एंबुलेंस लेकर मंडी चौराहा के पास रुक्मिणी विहार, मथुरा को निकल पड़े। सूचनादाता ने बताया कि एक बुजुर्ग व्यक्ति देखने में पढ़ा-लिख रहा है, लेकिन वह मनोरोगी प्रतीत हो रहा है, इन्हें अपना घर में प्रवेश दे दें।
जब बुजुर्ग को वृंदावन के अपना घर आश्रम लाकर भोजन दवा इत्यादि देकर पहचान कराई गई तो पता चला वह तो कस्टम विभाग के एडिशनल कमिश्नर रहे हरि कुमार कौशिक हैं। पत्नी मधुबाला कौशिक और बेटी गुंजन उन्हें ढूंढने अपना घर आईं थीं। सुधीर शुक्ला ने परिवार से संपर्क कर उन्हें अवगत कराया कि कौशिक को अपना घर में रेस्क्यू कर लाया गया।
जैसे ही उन्होंने यह सुना कि उनके पिता अपना घर में हैं तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा और 20 मिनट में अपना घर आश्रम उन्हें लेने के लिए पहुंच गए। आश्रम में आते ही एक दूसरे को देखते ही बिटिया और पत्नी हरि कुमार से लिपट लिपटकर रोने लगीं। कागजी कार्रवाई पूर्ण करने के बाद हरि कुमार कौशिक को उनके सुपुर्द कर दिया। इस मौके पर आचार्य नागेंद्र महाराज एवं कार्यालय प्रभारी योगेश शर्मा, विवेक पाठक भी थे।