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ShriBankeBihari Corridor: सेवायतों को छोड़ना पड़ेगा परिसर, पैतृक भवन तो जाएगा ही यजमानी पर भी खतरा, बढ़ी चिंता

Sun, 08 Jan 2023 02:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

वृंदावन स्थित ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी मंदिर में कॉरिडोर का निर्माण काम प्रस्तावित है। इसको लेकर जमीन व भवन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की गई है।   
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श्रीबांकेबिहारी मंदिर वृंदावन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वृंदावन स्थित विश्व विख्यात ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी मंदिर में प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण से सर्वाधिक प्रभावित ठाकुरजी के सेवायत होंगे। गलियारे की जद में आने वाले गोस्वामियों के 100 से अधिक मकान, दर्जन भर दुकान, अनेक प्राचीन निजी-पंचायती मंदिर सहित धर्मशाला आदि आएंगे। संभावना है कि मुआवजा आधारित अधिग्रहण होगा। मंदिर का विस्तार होने पर वर्षों से परिसर में आसन लगाकर पाठ-पूजा करने वाले व चंदन लगाने वालों को भी अन्यत्र जाना पड़ेगा। 

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ज्ञात हो कि तीर्थ यात्रियों को सुगमता पूर्वक दर्शन कराने के उद्देश्य से कॉरिडोर का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। ठा. श्रीबांकेबिहारी मंदिर के सेवायत व इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि बिहारीपुरा और मंदिर की मुख्य गली में अधिकतर मकान सेवायतों के ही हैं। 

बताया कि वामनपुरी, पुरोहितपाड़ा, मदन मोहन घेरा, कालीदह, जंगलकट्टी, पुराना शहर, प्रेमगली सहित मंदिर के सटे अन्य मोहल्लों में भी गोस्वामी परिवारों के निवास स्थान हैं। अनेक गोस्वामियों की दुकानें, अतिथि भवन, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, गोशाला इत्यादि भी बने हुए हैं। अपने निजी संसाधन से गोस्वामीजनों के पूर्वजों द्वारा बनवाए गए कई छोटे- बड़े मंदिर भी इस क्षेत्र में स्थापित हैं।
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उन्होंने कहा कि बिहारीजी कॉरिडोर बनने की सूरत में इन सभी भूस्वामी सेवायतों को मजबूरन कहीं और बसना पड़ेगा। क्योंकि, नगर की ज्यादातर जगह पर तो ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर का गालियारा और उससे संबंधित अन्य स्थलों के निर्माण प्रस्तावित हैं। सेवायत समाज पिछले कई सालों से यहां बसे हैं। उनकी अधिकांश कामकाजी जगह भी यहीं पर स्थापित हैं। ऐसे में एकदम नए स्थान पर जाकर बसने से उन्हें पैतृक भवन से तो हाथ धोना ही पड़ेगा, दूरी की वजह से यजमानी संबंधित हर तरह का नुकसान भी झेलना पड़ेगा।

सरकारी ट्रस्ट गठित हो जाने पर तो उनके कई अधिकार पर भी अंकुश लगने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पांच एकड़ में कॉरिडोर निर्माण की बात कह रही सरकार की कार्रवाई को देखकर लग रहा है कि अन्य जरूरी कार्यस्थल बनाने की आवश्यकता पड़ जाने पर वह कॉरिडोर का दायरा और बढ़ा सकती है।

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