मथुरा। ब्रज की माटी में पैदा हुआ बासमती चावल इस बार विदेशों में अपनी सुगंध बिखेरेगा। यहां सुगंधित बासमती चावल की खरीद के लिए आधा दर्जन से अधिक एक्सपोर्टर मथुरा की मंडियों से धान की खरीद कर रहे हैं। जनपद में इन दिनों सबसे अधिक खरीद भी बासमती चावल की हो रही है।
जनपद में 50 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में धान की खेती हो रही है। जिसमें करीब 20-25 लाख क्विंटल धान का उत्पादन होता है। इसका 95 प्रतिशत हिस्सा बासमती धान का है, जिसकी मात्रा करीब 20-25 लाख क्विंटल तक यहां उत्पादन की है। पिछले एक माह के दौरान जनपद की मंडी में 10-12 लाख क्विंटल तक बासमती धान खरीद हो चुकी है। यह खरीद यहां के स्थानीय कारोबारियों के साथ एक्सपोर्टर कर रहे हैं। इनमें केआरबीएल और एलटी फूड के रूप में बड़े एक्सपोर्टर मौजूद हैं। जानकारों का कहना है कि मथुरा में उत्पादित बासमती चावल 1509 और सुगंधा विदेशों के लिए एक्सपोर्ट होता है। इसे मुस्लिम देशों में सऊदी अरब, ईरान, यमन आदि देश शामिल हैं। यहां बिरयानी के लिए 1509 और सुगंधा का उपयोग किया जाता है।
मंडी के जानकार यह भी बताते हैं कि मथुरा के बासमती धान की 80 प्रतिशत खरीद विदेशी निर्यात के लिए ही हो रही है। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह का कहना है कि मथुरा में धान की अच्छी किस्म की खेती होती है। इनकी खरीद के लिए निर्यात भी यहां पहुंचते हैं। मुस्लिम कंट्री के देशों में मथुरा का चावल का बड़ा निर्यात है।
1509 और सुगंधा अधिक पसंद
मथुरा में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। इसमें बासमती की किस्म 1509, 1692, 1847, 1718, 1121 शामिल हैं। इसमें निर्यात के लिए बासमती की 1509 और सुगंधा को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है।
किसानों ने रोका धान
पिछली बार जनपद के किसानों को बासमती धान के रूप में 4000 से 4500 रुपये तक की कीमत मिली थी, जो इस बार 2800 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक रह गई। इसमें भी कुछ दिन के लिए एक्सपोर्टरों ने धान की खरीद भी बंद कर दी। इससे धान की भाव में और गिरावट आई। इसे देखते हुए इस बार किसानों ने धान की फसल को रोक भी लिया है। अब किसान धान की फसल की कीमत के बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।