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मथुरा: वसंती कमरे में विराजमान होकर राधारमणलाल जू ने दिए दर्शन

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मथुरा। वसंत पंचमी पर झिलमिल रोशनी से जगमगाता शाहजी मंदिर का वसंती कमरा।
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वृंदावन (मथुरा)। वसंत पंचमी पर बृहस्पतिवार को शाहबिहारी मंदिर के रंग-बिरंगी रोशनी से नहाए वसंती कमरे में विराजमान होकर ठाकुर राधारमणलाल जू महाराज ने भक्तों को दर्शन दिए।
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दर्शन के मध्य वसंती पोशाक धारण किए राधारमणलाल जू की झांकी के दर्शनों को भक्त अपलक निहारते रहे। ठाकुरजी को विभिन्न प्रकार के भोग निवेदन किए गए। दर्शन खुलते ही संपूर्ण मंदिर परिसर ठाकुरजी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। शाहबिहारी मंदिर में स्थित वसंती कमरा साल में सिर्फ दो बार खुलता है। एक बार वसंत पंचमी पर और दूसरी बार सावन में झूला उत्सव पर।
वर्ष में वसंत पंचमी के अवसर पर सिर्फ दो दिन खुलने वाले वसंती कमरे के दर्शनों को भक्त सुबह से ही कतारबद्ध खड़े रहे। जैसे ही वसंती कमरे के पट खुले, संपूर्ण मंदिर परिसर ठाकुरजी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। वसंती कमरे में पुराने झाड़-फनूस और रंग-बिरंगी रोशनी के बीच ठाकुरजी की छवि अत्यंत मनोहारी लग रही थी। मंदिर में दर्शनों का यह क्रम देर रात तक जारी रहा। भक्तों की टोलियां भजन एवं होली के गीत गाते हुए चल रही थीं। मंदिर में भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
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इधर, शुक्रवार को भी ठाकुर राधारमणलाल जू ने वसंती कमरे में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर के व्यवस्थापक केएस शाह और प्रशांत शाह एडवोकेट भी थे।
वसंत पंचमी को मंदिर बनकर हुआ था तैयार
तीर्थ नगरी वृंदावन के मंदिरों की अपनी विशेषता है। वहीं शाहबिहारी जी का मंदिर भी प्रमुख मंदिरों में अपना स्थान रखता है। सन् 1868 में बनकर तैयार हुए इस मंदिर का प्रथम उत्सव वसंत पंचमी के दिन ही मनाया गया था। ठाकुर बांकेबिहारी की प्राकटॺ स्थली निधिवन राज मंदिर के पास स्थित शाहबिहारी मंदिर का निर्माण लखनऊ के तत्कालीन नवाब बाजिद अली के सेठ शाह कुंदन लाल व फुंदन लाल ने चैतन्य महाप्रभु की भक्ति से प्रभावित होकर कराया था।
सन् 1860 में वसंत पंचमी के दिन बनना शुरू हुए इस मंदिर का निर्माण पूरा होने में 8 साल का समय लगा। शाहबिहारी मंदिर में वैसे तो हर वस्तु खास है, यहां सबसे खास है वसंती कमरा। बेशकीमती झाड़-फानूस से सुसज्जित वसंती कमरे की अलौकिक भव्यता श्रद्धालुओं को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती है। इस वसंती कमरे को ठाकुरजी का दरबारी हॉल या ऋतुराज भवन कहा जाता है। यहां भगवान अपने राजशाही ठाठ बाट के साथ दरबार में विराजते हैं। वसंती कमरे के बीचोंबीच इटली मार्बल की एक पीस शिला को नहर का रूप दिया गया है। इसमें तीन फव्वारे हैं। फव्वारे के सामने स्वर्ण जड़ित सिंहासन पर जब ठाकुरजी के दर्शन होते हैं तो यह अलौकिक छटा देखते ही बनती है।
कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध है वसंती कमरा
मंदिर के सेवायत प्रशांत शाह ने बताया इस तरह का ग्लास फिरोजाबाद में भी नहीं मिलता। इन झूमर में 1940 से पहले दीपक जलाए जाते थे, लेकिन जब वृंदावन में लाइट आई तो इनका विद्युतीकरण कर दिया गया। इस मंदिर का निर्माण करने में उस समय 10 लाख रुपये की लागत आई थी।
हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है मंदिर
शाहबिहारी जी का मंदिर जहां अपनी बेजोड़ कला का नमूना है वहीं यह हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक है। इस मंदिर के जगमोहन में पत्थर से बना बाजिद अली शाह का चित्र लगा है। वहीं शाह कुंदन लाल और शाह फुंदन लाल ने जो वैभव राज शाही ठाठ बाजिद अली के दरबार में देखे वही वैभव उन्होंने यहां भगवान को प्रदान किए।
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