प्रयागराज जिले में तैनात मथुरा के सिपाही आकाश की मौत के बाद शुक्रवार को शव उसके गांव अरतौनी लाया गया। शव गांव में पहुंचते ही परिजनों एवं ग्रामीणों में आक्रोश फूट पड़ा। परिजनों ने प्रयागराज पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए शव मथुरा-सादाबाद रोड पर रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। लगभग चार घंटे तक यह दौर चला। एसपी देहात के समझाने पर परिजन मान गए। धरना समाप्त कर सिपाही का अंतिम संस्कार कर दिया।
परिजन मांग कर रहे थे कि मामले की जांच करा कर दोषियों को सजा दिलाई जाए। मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी एवं आर्थिक सहायता दिलाई जाए। मृतक सिपाही आकाश के पिता थान सिंह, भाई विष्णु व चचेरे भाई गजेंद्र सिंह, त्रिवेंद्र सिंह, चाचा अजीत सिंह, मृतक के साले चंद्रवीर सिंह, जो प्रयागराज गए थे, सभी ने एक स्वर में प्रयागराज पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा वहां पुलिस ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। बातों को छुपाते रहे।
परिजनों ने बताया कि मृतक के पैर, छाती पर चोट के निशान हैं। वर्दी के तीन बटन फटे मिलना, सिर में तीन गोली लगी हैं। एक भी गोली मौके पर नहीं मिली। मौके खून फैला नहीं मिला। हमारी जासूसी कर किसी से मिलने नहीं दिया, उसके दोस्तों ने बताया आधा घंटा पहले बातचीत हुई थी, कोई तनाव व गुस्सा नहीं था। सीओ एवं आरआई पर आरोप हैं कि उनसे मिलने नहीं दिया। जिस महिला के साथ उसकी ड्यूटी थी, गैरहाजिर होने की बात कही गई, उसी महिला के घर बाइक एवं बैग मिला तो गैरहाजिर कैसे हो गया? सीओ पुलिस लाइन व आरआई द्वारा घटना साजिश के तहत की है। इसकी जांच रिटायर्ड जज से कराने की मांग की।
बड़े भाई दी ने मुखाग्नि
एसपी देहात श्रीशचंद्र, सीओ रविकांत पाराशर, थानाध्यक्ष नरेंद्र यादव, तहसीलदार मनोज कुमार वार्ष्णेय परिजनों व ग्रामीणों को समझाते रहे। रालोद के वरिष्ठ नेता जिला पंचायत सदस्य रामवीर भरंगर, जिला पंचायत सदस्य राजपाल भरंगर ने उच्चाधिकारियों से वार्ता की। बड़े भाई विष्णु ने मुखाग्नि दी। पत्नी चंचल बार-बार बेहोश हो रही थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया।