फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भगवान राम ने जातिवाद के खिलाफ जगत को दिया था संदेश : महंत सुतीक्ष्ण

विज्ञापन
विज्ञापन
वृंदावन। सुदामा कुटी नाभापीठ में चल रहे दस दिवसीय जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य महाराज की जयंती महोत्सव के अंतर्गत विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन


संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए नाभापीठाधिश्वर सुतीक्ष्ण दास महाराज ने कहा कि रामानंद एक वैष्णव संत थे, जिन्हें स्वामी रामानंद के नाम से भी जाना जाता था। उन्हें रामानंदी संप्रदाय को पुनर्जीवित करने का श्रेय दिया जाता है। रामानंद ने अपना अधिकांश समय वाराणसी में बिताया, वे उत्तर भारत में भक्ति परंपरा के संस्थापकों में से एक थे। ब्रजविहारी दास भक्तमाली ने कहा कि उत्तरी भारत के रामानंद एक प्रभावशाली समाज सुधारक थे।

जानकी शरण भक्तमाली ने कहा कि जातिवाद के खिलाफ़ क्रांति भगवान राम ने जगत को संदेश दिया। कभी भी किसी भी जाति के व्यक्ति को अपने पास आने से नहीं रोका। इसलिए रामानंद को एहसास हुआ कि हर कोई भगवान की पूजा का अधिकारी है। राममोहन दास रामायणी ने कहा कि भगवान राम के प्रति स्वयं को उचित रूप से समर्पित करने के लिए, उन्हें लगा कि किसी को अपनी जाति की पहचान और सामाजिक पद को खोना होगा।
विज्ञापन


संगोष्ठी में राम विलास चतुर्वेदी, संजीव शास्त्री, डॉ. कृष्ण मुरारी, महंत अवधेश दास ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर महंत अमरदास, गोपेश दास, अवनीश बाबा प्रेमनारायण, प्रेमदास, पूर्ण प्रकाश कौशिक, किशोर दास, मोहन कुमार शर्मा, गोपाल शरण शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन राम संजीवन दास शास्त्री ने किया।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें