मथुरा। 14 वर्ष पहले बरसाना क्षेत्र के गांव भरना खुर्द में दीवार के विवाद में हत्या के 5 दोषियों को एडीजे-4 डाॅ. पल्लवी अग्रवाल की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 62-62 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस मुकदमे की खास बात यह रही कि हत्या की घटना को पुलिस ने नकारते हुए एफआर लगा दी थी, लेकिन वादी ने कड़ी पैरवी कर उच्चाधिकारियों से सीबीसीआईडी से फिर से विवेचना कराने के आदेश करा लिए। सीबीसीआईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर कोर्ट में ट्रायल चला।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी हेमेंद्र भारद्वाज ने बताया कि घटना 10 फरवरी 2009 की है। हरिओम पुत्र धर्म सिंह निवासी भरना खुर्द ने रिपोर्ट में आरोप लगाया कि उनका पड़ोसी से दीवार को लेकर झगड़ा हुआ, जिसमें विपक्षियों ने उसके भाई रामगोपाल के सीने में गोली मार दी है। भाई के साथ मौजूद सुखदेव की आंख में छर्रे लगे। हरिओम द्वारा गांव के मोहन श्याम पुत्र रघुवर, महादेव पुत्र बिरमा, दाऊजी पुत्र देवकीनंदन, मोहन श्याम पुत्र बुद्धि और गोपाल पुत्र तेजा को हत्या का आरोपी बनाया गया। इधर, दूसरे पक्ष से बुद्धि पुत्र तेजा ने मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें आरोप लगाया कि उसे व उसके बच्चों को सुरेश पुत्र रामदयाल, हुकुम पांडे पुत्र धर्म सिंह, हरिओम पुत्र धर्म सिंह व कन्हैया पुत्र तोता ने जान से मारने का प्रयास किया।
पुलिस ने दोनों मुकदमों की विवेचना करने के बाद बुद्धि पुत्र तेजा द्वारा कराए मुकदमे में चार्जशीट दाखिल कर दी। जबकि हरिओम द्वारा कराए हत्या के मुकदमे में तथ्यों को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत करते हुए एफआर लगा दी। वादी हरिओम ने इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत की। शिकायत पर पुनः विवेचना सीबीसीआईडी द्वारा कराए जाने के आदेश हुए। सीबीसीआईडी द्वारा हत्या के आरोप में मोहन, महादेव, दाऊजी, मोहन श्याम, गोपाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। एडीजीसी के अनुसार एडीजे-4 की अदालत में कुल 11 गवाह पेश किए। कोर्ट ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर सभी को दोषी पाते हुए उम्रकैद और 62-62 हजार रुपये की सजा सुनाई है।
हरिओम पक्ष के चार जानलेवा हमले में दोषी, 7-7 वर्ष का कारावास
इस मामले में बुद्धि पक्ष द्वारा कराई गई क्रॉस एफआईआर में नामजद नौ आरोपियों में से चार को दोषी पाते हुए सात-सात साल की कैद और 38-38 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। एडीजीसी नरेंद्र शर्मा ने बताया कि एडीजे-4 की अदालत में ही इस मुकदमे का भी ट्रायल चला। इस मुकदमे में कुल 9 अभियुक्त बनाए गए थे, जिसमें से सुरेश पुत्र रामदयाल, हुकुम पांडे पुत्र धर्म सिंह, हरिओम पुत्र धर्म सिंह व कन्हैया पुत्र तोता को सजा सुनाई है। वहीं, चार अन्य आरोपी ओमप्रकाश, लोकमानी, रामदेव, व जयदेव को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है। एक आरोपी राजेंद्र की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।