मांट(मथुरा)।लॉकडाउन की वजह से समाज के एक बड़े तबके के सामने आजीविका का संकट गहरा गया है। ऐसे में उन्हेें अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में ही पसीना आ रहा है, उस पर पाठ्य-पुस्तकों की बिक्री में भी जमकर मनमानी हो रही है। किताबों के साथ महंगी कापियां व स्टेशनरी अनिवार्य रूप से लेनी पड़ रही है। अभिभावकों पर ऊंचे दामों पर स्कूलों द्वारा तय की गई दुकानों से कोर्स खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से कारोबार और रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। तमाम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में ही पसीना आ रहा है। बावजूद, स्कूलों की ओर से ऐसे अभिभावकों को कोई खास रियायत नहीं दी जा रही है। फीस तो उनसे पूरी ली ही जा रही है। उस पर किताबों की बिक्री में भी जमकर मनमानी हो रही है। किताबों की कीमतों में रियायत देने की बात तो दूर अभिभावकों को ऊंचे दामों पर कापियां व स्टेशनरी खरीदने का भी दबाव बनाया जा रहा है। कॉपी व स्टेशनरी लेने में आनाकानी करने वाले अभिभावकों को किताबें भी नहीं दी जा रही हैं। स्कूलों द्वारा तय की गई दुकानों से ही अभिभावकों को किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। इसमें कमीशनखोरी की भी बू आ रही है।