ठा. श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर : काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह मिलेंगी सुविधाएं
- दो घंटे चली प्रशासन व आंदोलनकारियों की बैठक, फिलहाल नतीजा नहीं निकला, प्रशासन ने मांगा सहयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। सीएम योगी आदित्याथ की नाराजगी के बाद बृहस्पतिवार शाम कलक्ट्रेट सभागार में मंदिर प्रबंधन से जुड़े सेवायत गोस्वामियों व व्यापारियों के साथ अफसरों ने बैठक की। सेवायतों ने सर्वे में मनमानी के आरोप लगाए। हालांकि प्रशासन की तरफ से आश्वस्त किया गया कि जिस तरह से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के दौरान एक कमेटी ने मुआवजा समेत अन्य सुविधाएं दी थीं, ठीक उसी तरह से ठा. श्रीबांकेबिहारी कॉरिडोर में भी किया जाएगा। यह सब कुछ हाईकोर्ट व प्रदेश सरकार के दिशा निर्देश पर होगा।
आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि प्रशासन हमें मुआवजा समेत अन्य सुविधाओं के लिए लिखित में दे तो प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि कोर्ट के दिशा निर्देश के बाद ही यह संभव हो सकेगा।
दरअसल, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अच्छे वातावरण में समन्वय बैठक हुई है। सूत्र बताते हैं कि सेवायत गोस्वामियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि पिछले एक सप्ताह से विरोध चल रहा है लेकिन किसी ने बातचीत की पहल नहीं की। ऐेसे में संशय लाजिमी है। प्रशासन क्या कर रहा है, स्पष्ट करें। अधिकारी यही कहते रहे कि श्री बांके बिहारी कॉरिडोर एवं वृंदावन की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने में अपना सहयोग दें और भ्रामक अफवाहों से दूर रहें। हालांकि बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।
सीएम की नाराजगी के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन
ठा. श्रीबांकेबिहारी कॉरिडोर को लेकर पिछले एक सप्ताह से मंदिर के सेवायत गोस्वामी, व्यापारी व अन्य लोग प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इसे लेकर कई दिन बाजार बंद रहे। सेवायत गोस्वामियों के परिवार की महिलाएं भी इस आंदोलन में शामिल हुई और गोवर्धन के सेवायतों समेत अन्य ने भी गोस्वामियों का समर्थन किया। ये लोग मांग कर रहे हैं कि वृंदावन की कुंज गलियों व अस्तित्व से छेड़छाड़ न की जाए। मंदिर किसी दूसरे स्थान पर बनाया जाए। इन आंदोलनों की गूंज लखनऊ तक पहुंची तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहां के जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए कहा कि गुस्साए मंदिर प्रबंधन व व्यापारियों से बात करें और उन्हें समझाएं। इसी के चलते बुधवार को विधायक श्रीकांत शर्मा ने सेवायतों से बात की। वहीं बृहस्पतिवार शाम को मंदिर प्रबंधन से जुड़े सेवायत गोस्वामियों व व्यापारियों के साथ अफसरों ने बैठक की।
दो घंटे चली वार्ता
जिलाधिकारी पुलकित खरे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पाण्डेय व नगर आयुक्त अनुनय झा ने श्रीबांके बिहारी जी मंदिर के गोस्वामी समाज, सेवायत, मंदिर प्रबंधक, व्यापारी एवं दुकानदारों के साथ करीब दो घंटे (६- ८ बजे तक) बात की। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने भय एवं शंकाओं को दूर करने का प्रयास किया। आश्वस्त किया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ही सर्वे कराया गया है। न्यायालय में विचाराधीन है। प्रस्ताव को सभी के हितों का ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, किसी का नुकसान नहीं होगा। भविष्य में यदि कॉरिडोर बनेगा, तो दुकानदारों को पूर्व की भांति रजिस्टर्ड दुकानें आवंटित की जाएंगी और निवासियों को सरकार से अच्छा मुआवजा दिया जायेगा। बैठक में नगर मजिस्ट्रेट सौरभ दुबे, सीओ सदर प्रवीन मलिक, मंदिर प्रबंधक मुनीष शर्मा, ज्ञानेन्द्र किशोर गोस्वामी, रजत गोस्वामी, घनश्याम गोस्वामी, बालकृष्ण गोस्वामी, दिनेश गोस्वामी, दीपचन्द्र गोस्वामी सहित आदि मौजूद रहे।
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क्यों उठी कॉरिडोर की मांग
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भीड़ के दबाव में श्रीबांकेबिहारी मंदिर में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और करीब ७० लोग घायल हुए थे। शासन ने इसे गंभीरता से लिया और पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की। टीम ने काशी समेत अन्य कॉरिडोर का दौरा, मंदिरों प्रबंधन व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करके अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। शासन ने उसी रिपोर्ट को उच्च न्यायालय में दिया। इसके बाद सेवायत पक्ष हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश को जांच के लिए भेजा और उन्होंने भी कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दी। इसके बाद कोर्ट के ही आदेश पर शासन ने डीएम से रिपोर्ट मांगी। डीएम ने आठ सदस्यीय टीम गठित पांच एकड़ में प्रस्तावित कॉरिडोर का सर्वे किया और करीब ३०० के आसपास की संपत्तियों का सर्वे कर शासन को रिपोर्ट भेज दी। शासन द्वारा इस रिपोर्ट को भी कोर्ट में दाखिल किया जा चुका है। उधर, मंदिर के सेवायत गोस्वामी अपने अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट चले गए, जिसकी २३ जनवरी को सुनवाई है।
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