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Mathura News: थैलेसीमिक तो नहीं, विवाह से पहले की करा लें जांच

Sun, 07 May 2023 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
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मथुरा। थैलेसीमिया होने पर रोगी को रक्त चढाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। यह बीमारी आनुवंशिक तौर पर माता-पिता से मिलती है। इसलिए चिकित्सक इससे बचने के लिए दवा की नहीं सतर्कता को जरूरी बताते हैं। वे कहते हैं कि माता या पिता किसी एक में या दोनों में थैलेसीमिया के लक्षण है तो यह रोग बच्चे में जा सकता है। इसलिए बेहतर है कि बच्चा प्लान करने से पहले या शादी से पहले ही अपने जरूरी मेडिकल टेस्ट करा लेने चाहिए।थैलेसीमिया, रक्त संबंधित ऐसा रोग है, जिसकी वजह से व्यक्ति को कई अन्य शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह रोग आमतौर पर जन्म से ही बच्चे को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन सही तरीके से नहीं हो पाता है और इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है। यह दो प्रकार का होता है। माइनर और मेजर। जिन बच्चों में माइनर थैलेसीमिया होता है, वे लगभग स्वस्थ जीवन जी लेते हैं। जबकि जिन बच्चों में मेजर थैलेसीमिया होता है उन्हें लगभग हर 21 दिन बाद या महीने भर के अंदर उनके वजन के अनुसार एक यूनिट अथवा इससे कम खून चढ़ाना पड़ता है..
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20 दिन होता है कोशिकाओं का जीवन
शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करती है, तो लाल रक्त कोशिकाएं शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बनाए रखती हैं। सामान्य व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की उम्र लगभग 120 दिन होती है, लेकिन थैलेसीमिया के रोगी में इन कोशिकाओं का जीवन करीब 20 दिन रह जाता है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकुंद बंसल कहते हैं कि थैलेसीमिया एक वंशानुगत रोग है। इसमें एक तो कोशिकाओं का निर्माण नहीं होता, फिर जो कोशिकाएं ब्लड के साथ रोगी के शरीर में चढ़ाई जाती हैं, उनका जीवन बहुत ही कम हो जाता है। इस कारण रोगी को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
कैसे होता है घातक या कम घातक
माता-पिता दोनों को यह रोग है लेकिन कम घातक है तो बच्चे को थैलेसीमिया होने की आशंका बहुत अधिक होती है और उसे यह रोग गंभीर सकता है।
- माता-पिता दोनों में से किसी एक को यह रोग है और कम घातक है तो आमतौर पर बच्चों में यह रोग ट्रांसफर नहीं होता है। यदि हो भी जाता है तो बच्चा अपना जीवन लगभग सामान्य तरीके से जी पाता है। कई बार तो उसे जीवनभर पता ही नहीं चलता कि उसके शरीर में कोई दिक्कत भी है।
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जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में वर्तमान में करीब 40 थैलेसीमिया ग्रसित बच्चे पंजीकृत हैं। इन्हें पूरी तरह निशुल्क ब्लड दिया जाता है। इसके बदले में ब्लड भी नहीं लिया जाता है। हमारे पास इस समय 264 यूनिट ब्लड उपलब्ध है। इसमें चारों पॉजीटिव और चारों नेगेटिव ग्रुप का ब्लड शामिल है।
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- डॉ. मुकुंद बंसल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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