मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रीबांके बिहारी कॉरिडोर का रास्ता साफ कर दिया है। श्रद्धालुओं की यह हल हो गई है, लेकिन दूसरी समस्या जाम की है। वृंदावन के जाम से यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं को जूझना पड़ता है।
यह हाल तब है, जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीती 26 जुलाई को यहां का दौरा किया था। अधिकारियों से यातायात और भीड़ प्रबंधन पर आगामी 100 साल का प्लान मांगा था। अधिकारियों ने सीएम के सामने बड़े-बड़े दावे किए थे। मगर, उनकी हवा निकल गई। चार माह बीतने को है, लेकिन जाम से मुक्ति का प्लान लागू नहीं हो सका है।
वृंदावन में जाम की समस्या के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार ई-रिक्शा हैं। स्थानीय प्रशासन का इन पर अंकुश नहीं है। ट्रैफिक पुलिस दिन भर जाम खुलवाने के लिए जूझती रहती है। जबकि ई-रिक्शाओं की संख्या न तो नगर निगम तय कर रहा है और न ही परिवहन विभाग पंजीकरणों पर रोक लगा रहा है। अकेले वृंदावन में 50 से अधिक ई-रिक्शा डीलर्स हैं। आखिर क्यों इन्हें परिवहन विभाग यहां ई-रिक्शा बेचने की अनुमति दे रहा है।