मथुरा में गोकुल-से वृंदावन तक जलमार्ग ब्रज में पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। यमुना में क्रूज संचालन के दौरान नदी किनारों पर ब्रज की पूरी धर्म-संस्कृति को प्रचारित किया जाएगा। पर्यटन के सापेक्ष स्थानीय रोजगार में भी वृद्धि को लक्ष्य बनाया जा रहा है। पर्यटकों के आने से कंठी-माला, ठाकुरजी की पोशाक, नौका-संचालन आदि से जुड़े लोगों को फायदा होगा।
गोकुल से यमुना तक लगभग 22 किमी लंबा जलमार्ग है। इसके विकास की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। कोशिश है कि यमुना किनारों को ऐसा बनाया जाए कि उन्हें देखकर श्रद्धालु-पर्यटकों को ब्रज की स्थानीय संस्कृति के दर्शन हों। इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि इस मार्ग में क्रूज चलने के बाद छोटे-छोटे कारोबार करने वालों को इसका सीधा लाभ मिले। दरअसल क्रूज संचालन से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। इससे कंठी-माला, ठाकुरजी की पोशाक आदि के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। सबसे ज्यादा लाभ उन नाविकों को होगा, जो छोटी नाव या स्टीमर चलाते हैं, क्योंकि ब्रज में अधिकांश लोग यमुना में नौका विहार करना पसंद करते हैं। इसके अलावा चुनरी मनोरथ आदि भी नौकाओं से ही होता है। एमवीडीए के ओएसडी प्रसून द्विवेदी ने बताया है कि यमुना घाटों के सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना शासन को भेजी गई है।
हर वर्ग के लिए जल पर्यटन होगा सुलभ
यमुना में क्रूज चलने के बाद हर वर्ग के लिए जलमार्ग सुलभ और सुगम होगा। यानि जो लोग नाव पर सवारी करना चाहते हैं, वे नाव की सवारी करेंगे, जबकि मध्यम और धनाढ्य वर्ग के लोग अपनी क्षमता के अनुसार क्रूज पर सवारी कर सकते हैं। एक ओर नावों के सहारे चुनरी मनोरथ जैसे पारंपरिक कर्मकांड हो सकेंगे तो दूसरी ओर क्रूज पर सादगी भरी पार्टी भी हो सकेगी।
इन स्थानों का होगा विकास
जुगल घाट, विहार घाट, केशी घाट, देवराहा बाबा घाट, पानीगांव, कंसकिला, स्वामी घाट, विश्राम घाट, सुदर्शन घाट, गोकुल घाट और गोकुल बैराज के समीप पर विकास कार्य कराए जाएंगे।
छोटी नौकाओं के संचालन को भी किया जाएगा प्रोत्साहित
एमवीडीए उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप ने बताया कि यमुना में जलमार्ग विकसित किए जाने के क्रम में छोटी नौकाओं के संचालन को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि स्थानीय नाविकों की आय में वृद्धि हो।