वृंदावन। नगर निगम मथुरा-वृंदावन के नए बोर्ड गठन को करीब 14 महीने हो चुके हैं। इन 14 महीनों में केवल चार बार सदन की बैठक हुई है तो तीन बार बोर्ड बैठक हो सकी है। 15 दिन पूर्व पार्षदों ने महापौर विनोद अग्रवाल से सदन और बोर्ड बैठक बुलाने की मांग की थी, पर अभी तक बोर्ड बैठक और सदन का न होना सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारों के अनुसार हर महीने सदन की मीटिंग होनी चाहिए या फिर साल में छह बार सदन की मीटिंग बुलाई जानी चाहिए, पर ऐसा मथुरा-वृंदावन नगर निगम के नए बोर्ड में नहीं हो सका। कुछ ऐसा ही हाल बोर्ड बैठक न बुलाने का है। 14 महीने में केवल तीन ही बोर्ड बैठक बुलाई गई हैं। साल में कम से कम चार या फिर अधिक से अधिक हर दो महीने में बोर्ड बैठक बुलाने का नियम है।
भाजपा पार्षद दल के उपनेता चौधरी राजवीर सिंह और पार्षद राजीव सिंह ने 15 दिन पूर्व महापौर से सदन और बोर्ड बैठक बुलाने की मांग की थी, पर इस पर आजतक चर्चा नहीं हुई। पार्षद वैभव अग्रवाल व राजीव सिंह का कहना है कि अगर समय से बोर्ड और सदन की बैठक हो तो जनता का लाभ होगा।
अगस्त में बुलाएंगे सदन और बोर्ड बैठक
14 महीने जरूर बोर्ड को हो गए हैं तो इनमें से दो माह आचार संहिता के चलते कुछ भी संभव नहीं हो सका। रहे 12 महीने में चार सदन और तीन बोर्ड मीटिंग हो चुकी हैं। फिलहाल विधानसभा का सत्र के चलते बोर्ड मीटिंग संभव नहीं है। इसलिए अगस्त में सदन और बोर्ड बैठक बुलाई जाएगी।
- विनोद अग्रवाल, महापौर, मथुरा-वृंदावन नगर निगम