मथुरा। यमुना में बाढ़ के कारण जहां हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित होकर राहत शिविरों में रात-दिन काट रहे हैं, वहीं इस बाढ़ के कारण सैकड़ों लोगों की आजीविका पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। इसी तरह यमुना किनारे घाटों पर अपने यजमानों को पूजा पाठ कराकर अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करने वाले पुरोहितों की रोजी रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है।
जबकि पुरोहितों को आस थी कि अधिक मास होने के कारण उनकी आमदनी दोगुनी-तिगुनी हो जाएगी। बाढ़ के कारण तीर्थ घाट व विश्राम घाट पर आरती स्थल तक पानी आ गया। इसके चलते यहां पर्यटक नहीं आ रहे हैं। पर्यटकों और यजमानों के यमुना तक न आने के कारण ही पुरोहितों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। दाऊजी घाट पर पुरोहिताई करने वाले प्रतीक पाठक ने बताया कि यमुना मैया में पानी ज्यादा आ जाने के कारण यजमान यहां नहीं आ पा रहे हैं। बाढ़ के पानी के वीडियो और फोटो इतने अधिक वायरल हो गए हैं कि अन्य प्रदेशों के यात्री भयभीत हो गए हैं। काफी सारी बुकिंग निरस्त हो गई हैं। अधिक मास में उम्मीद थी कि बेहतर आमदनी होगी. लेकिन सब पर पानी फिर गया।
सारी बुकिंग हुई निरस्त, रोजी रोटी पर संकट
असकुंडा घाट पर मिले पुनीत चतुर्वेदी ने बताया कि बाढ़ आने से उनकी रोजी रोटी पर ही संकट खड़ा हो गया है। इस बार सावन मास में अधिक मास होने से उम्मीद थी कि काफी यजमान आएंगे। कई सारी बुकिंग भी हो चुकी थीं लेकिन बाढ़ के चलते सभी बुकिंग कैंसिल हो गईं। यात्रियों ने भी आने से मना कर दिया। यहां तक कि जो यहां रुके थे वो भी बिजली पानी न होने के कारण चले गए।
पुराेहितों को मिले मुआवजा
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के कार्यकारिणी सदस्य एवं पुरोहित राकेश तिवारी ने कहा कि बाढ़ की वजह से काफी संख्या में यात्रियों की बुकिंग निरस्त हो गई हैं। इससे पुरोहितों को काफी नुकसान हुआ है। अधिक मास से आस थी कि आर्थिक स्थिति मजबूत होगी लेकिन बाढ़ के चलते यह संभावना भी खत्म हो गई। तीर्थ पुरोहितों को भी सरकार से कुछ मुआवजा मिलना चाहिए।