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Mathura News: यमुना में जहरीले पानी से मरीं मछलियां

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वृंदावन (मथुरा)। पतित पावनी यमुना का पानी जहरीला हो गया है। इस कारण जलचर मर रहे हैं। बिहाघाट क्षेत्र में यमुना में कई दर्जन मछलियां मर गईं। यमुना किनारे रह रहे मल्हारों ने यमुना में मछलियों के मरने पर दुख व्यक्त किया है। वहीं याचिकाकर्ता ने नाराजगी जताते हुए इस मामले को एक बार फिर उच्च न्यायालय में रखने की बात कही है।
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शुक्रवार शाम बिहारीघाट पर यमुना किनारे छोटी-बड़ी दर्जनों मछलियां मृत पड़ी मिलीं। यमुना पूजन को पहुंचे श्रद्धालुओं की आस्था किनारे पर मृत मछलियों को देख आहत हुई, वहीं नाविकों ने दुख जताया है। यमुना किनारे रहने वाले नाविक उमाशंकर निषाद ने कहा कि यमुना में नगर के नालों का दूषित पानी सीधे तौर पर जा रहा है।
वहीं कोसी ड्रेन का कैमिकल युक्त पानी भी यमुना में आ रहा है। इससे यमुना का पानी जहरीला हो गया है। यमुना में जलचर पिछले दो दिनों से मर रहे हैं। बृहस्पतिवार को बिहारघाट पर यमुना किनारे छोटी मछली मृत देखी गईं, लेकिन शुक्रवार शाम को यहां बड़ी मछलियां भी मृत पाई गईं। अब यमुना जल से आचमन करने के योग्य नहीं है।
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वंशी निषाद ने कहा कि यमुना प्रदूषण मुक्ति के नाम पर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद स्थिति यमुना की स्थिति कई दशक से जस की तस है। दिल्ली, कोसी की तरह से फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी यमुना में आ रहा है।



छह माह से नहीं लिए सैंपल, न ही हुई बैठक, कोर्ट में रखेंगे मामला

यमुना प्रदूषण को लेकर उच्च न्यायालय के याचिकाकर्ता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना प्रदूषण को लेकर नोडल अधिकारी एडीएम वित्त योगानंद पांडेय द्वारा पिछले छह माह से बैठक नहीं की गई। नहीं पिछले छह माह से अधिक समय से यमुना के सैंपल लिए गए। वृंदावन में सीवर लाइन की मरम्मत का कार्य पिछले एक साल से चल रहा है जो पूरा नहीं हुआ है। इस कारण वृंदावन के टैप नालों का दूषित पानी भी यमुना में जा रहा है। इस मामले को वह आगामी तारीख में उच्च न्यायालय के समक्ष रखेंगे।



पानी में फास्फेट बढ़ने और ऑक्सीजन कम होने से मरती हैं मछलियां

केआर डिग्री कॉलेज की रसायन विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. ममता रानी कौशिक ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों और सीवर का पानी यमुना में जाने से पिलिक यानी फास्फेट की मात्रा बढ़ जाती है। इसका प्रभाव यमुना के पानी में ऑक्सीजन पर पर पड़ता है। पानी में ऑक्सीजन कम होने से मछलियां मर सकती हैं।

क्या बोले अधिकारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी योगेंद्र कुमार ने बताया कि शुक्रवार को शासन से आई टीम के साथ गोकुल बैराज पर यमुना के पानी के सैंपल लिए गए, जिसमें डॉल्यूट ऑक्सीजन वॉल्यूम सात आया है। इस कारण यमुना के पानी में मछलियों के मरने की संभावना नहीं है। तीन से कम डीओवी पर ही मछलियां मर सकती हैं। इस मामले में कल टीम जांच करने जाएगी। संभवत: यात्रियों द्वारा अधिक खाना खिलाने के कारण भी मछलियां मर सकती हैं।
यमुना कार्य योजना के नोडल अधिकारी एवं एडीएम वित्त योगानंद पांडेय ने कहा कि यमुना में मछली मर जाने के मामले में जांच की जाएगी। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी से भी बात की जाएगी।
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