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होटल की अव्यवस्थाएं बता रहीं प्रशासन की खामियां

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वृंदावन(मथुरा)। बसेरा ग्रुप के होटल वृंदावन गार्डन में बृहस्पतिवार को हुए हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं। बसेरा ग्रुप के होटल बसेरा, होटल बसेरा ब्रजभूमि और होटल वृंदावन गार्डन में अग्निशमन विभाग से एनओसी ही नहीं ली गई थी। तीनों होटलों का स्थलीय निरीक्षण पर प्रशासनिक लापरवाही और अग्निशमन विभाग की मिलीभगत का खेल उजागर हुआ है। लखनऊ के होटल व आगरा के अस्पताल में आग की घटना के बाद अग्निशमन विभाग व प्रशासन ने मिलकर अभियान भी चलाया था लेकिन बसेरा ग्रुप के एक भी होटल तक अधिकारी नहीं पहुंच सके। इससे पहले श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में हुए हादसे के बाद भी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
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वृंदावन के अटल्ला चुंगी स्थित होटल बसेरा ब्रजभूमि में घोर लापरवाही सामने आई। होटल ब्रजभूमि में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र मार्च में एक्सपायर हो चुका है। रमणरेती स्थित होटल बसेरा में भी न तो प्रमाणपत्र है न ही फायर सेफ्टी उपकरण दुरुस्त पाए गए हैं। होटल वृंदावन गार्डन में भी अग्निशमन यंत्र देखने के लिए थे, न कि काम के लिए।
मुख्य अग्नि शमन अधिकारी प्रमोद शर्मा ने बताया कि विभाग द्वारा नोटिस जारी करने के बावजूद बसेरा ग्रुप ने कभी भी गंभीरता नहीं दिखाई। नतीजन यह दुखद घटना घटित हो गई। उन्होंने बताया कि इस मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अधिकारियों के आदेश पर बसेरा ग्रुप के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विदित है कि बसेरा ग्रुप की घोर लापरवाही ने दो लोगों की जान ले ली, जबकि तीसरा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। विभाग के नोटिस के बावजूद बसेरा ग्रुप ने अग्नि सुरक्षा मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया।
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समय रहते आग पर पा लिया काबू नहीं तो मंजर भयावह हो सकता था
वृंदावन। बृहस्पतिवार की सुबह होटल वृंदावन गार्डन में जिस वक्त आग लगी उस वक्त होटल के सभी 25 कमरों में करीब १०० यात्री ठहरे थे। इनके साथ लगभग १२ से अधिक कर्मचारी भी मौजूद थे। होटल की जिस बिल्डिंग में आग लगी, वह 3 फ्लोर की है। इसमें पहली में रेस्टोरेंट्स, दूसरी में किचन और तीसरी में गोदाम है। आग की शुरुआत गोदाम से हुई है। वहीं, इसी बिल्डिंग से सटी बगल में दूसरा ब्लॉक है, उसमें 25 कमरे बने हुए हैं। इनमें सूरत और हिसार के यात्री ठहरे हुए थे। ये श्रीमद्भागवत कथा सुनने आए थे। ओडिशा के भागवत प्रवक्ता भागवत कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को भागवत कथा का आखिरी दिन था। वहीं होटल के बराबर से दूसरा गेस्ट हाउस भी है। अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो आग होटल की दूसरे ब्लाक एवं बगल वाले गेस्ट हाउस में भी पहुंच सकती थी। इससे हादसा और भी भयावह हो सकता था। अगर होटल के निचले तल में आग लगती तो पूरा होटल आग की चपेट में आ सकता था।
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26 अक्तूबर को होटल में आए थे श्रद्धालु
वृंदावन। होटल वृंदावन गार्डन में ठहरे सूरत के यात्री कृष्ण सिंघल, राजेश मित्तल और विष्णु ने बताया कि सुबह 5 बजे तेज आवाज आने लगी। ऐसा लगा कहीं किसी से झगड़ा हो गया है। बिल्डिंग से नीचे आकर गार्डन में देखा तो होटल में आग दिखाई दी। फिर अपने साथ वालों को होटल में जाकर उठाना शुरू किया। हम 26 अक्तूबर से ठहरे हुए थे। भागवत कथा सुनने आए थे। बृहस्पतिवार को हवन होना था। उन्होंने बताया कि पहले हम सभी लोगों ने लगभग 5 बजे दमकल विभाग को फोन मिलाया लेकिन बहुत देर तक फोन न उठने पर 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस से हमने दमकल को घटनास्थल पर भेजने के लिए गुहार लगाई। आग लगने के लगभग एक घंटे के बाद दमकल यहां पहुंची। तंग गलियों से वाले शहर में अभी तक फायर स्टेशन भी नहीं है। आग की घटना होने पर मथुरा से ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां जाती हैं। पिछले दिनों वृंदावन में आग की घटना के बाद दो गाड़ियां वहां पर खड़ी करने की व्यवस्था की गई थी लेकिन बाद में वहां रहने व अन्य व्यवस्थाएं न होने के कारण वहां से हटा दिया गया था। एसएसपी अभिषेक यादव ने कहा कि फायर स्टेशन के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
सुबह होटल के टॉप फ्लोर पर आग लगने की सूचना मिली। जिसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पा लिया। टॉप फ्लोर में गोदाम में दो कर्मचारी सो रहे थे। आग में झुलसने से उन दोनों की मृत्यु हो गई, जबकि तीसरा अस्पताल में भर्ती है। होटल में ठहरे सभी यात्री सुरक्षित हैं। जिस कमरे में आग लगी वहां कागज, गद्दे और इलेक्ट्रॉनिक सामान रखा गया था। आग किन कारणों से लगी है। जांच की जा रही है।
अभिषेक यादव, एसएसपी मथुरा।
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भयभीत यात्री चले गए घर
वृंदावन। होटल वृंदावन गार्डन में जिन दो कर्मचारियों की मौत हुई है। उनकी शिनाख्त उमेश (30) निवासी कासगंज और वीरी सिंह (40) निवासी दरबै मांट के रूप में हुई है। होटल के मैनेजर ऋषि कुंतल ने बताया कि यह दोनों स्टोर में ही सो रहे थे, वहां भड़की आग से इनको निकलने तक का मौका नहीं मिला। दोनों की जिंदा जलकर मौत हो गई। वहीं, एक अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गया है। टॉप फ्लोर पर स्टोर रूम था। इसमें रजाई-गद्दे जैसे सामान भी रखे हुए थे। इनमें आग इतनी तेजी से फैली कि कर्मचारियों को बचने तक का मौका भी नहीं मिला। हादसे के बाद यात्रियों ने होटल खाली कर दिया। सुबह सभी अपना सामान लेकर निकल गए। इन दिनों शहर के अन्य हाटलों में भी जगह नहीं है। आग की घटना के बाद यात्री अपने घरों के लिए निकल गए।
सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस
फिलहाल पुलिस ने जांच होने तक होटल में ताला जड़ दिया है। पुलिस वहां लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाल रही है, यह देख रही है कि जिस स्टोर रूम में आग लगी, वहां पर कितने कर्मचारी ठहरे थे। कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि सुबह किसी ने बीड़ी या सिगरेट पी हो। जलती हुई माचिस या सिगरेट-बीड़ी फेंक दी हो, जिससे धीरे-धीरे आग सुलग गई हो। अचानक आग ने पूरे स्टोर को चपेट में लिया हो, जिससे निकलने का मौका ही नहीं मिला। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
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