मथुरा। यमुना का जल स्तर एक सप्ताह तक लगातार गिरावट के बाद सोमवार को फिर से बड़ गया। पिछले 24 घंटे में यमुना के जलस्तर में 34 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रयागघाट पर यमुना 165.19 मीटर के निशान पर बह रही है, जो कि खतरे के निशान से 81 सेंटीमीटर नीचे है।
पिछले 25 दिन में यमुना के जल स्तर में तीन बार उतार चढ़ाव देखने को मिला। बीती 17 जुलाई को यमुना ने 167.30 मीटर के निशान को छूआ था। इसके बाद जलस्तर में गिरावट आई, लेकिन आठ दिन बाद फिर उफान देखने को मिला। जल स्तर फिर से 166.66 मीटर तक पहुंचा, लेकिन दो दिन बाद इसमें गिरावट का दौर शुरू हो गया। पिछले करीब एक सप्ताह से यह स्थिति बरकरार रही। जलस्तर निरंतर कम हो रहा था, लेकिन पिछले 24 घंटे के दौरान घटने के बजाए जलस्तर में 34 सेंटीमीटर का इजाफा हो गया है। रविवार शाम चार बजे जलस्तर 164.85 मीटर था, जो सोमवार को इसी समय 165.19 मीटर हो गया।
यमुना के घाटों पर पानी में इजाफा देख लोगों को फिर से बाढ़ का डर सताने लगा है। हालांकि तोजवाला और ओखला बैराज से छोड़े जा रहे पानी की स्थिति सामान्य बनी हुई है। गोकुल बैराज पर आगरा के लिए छोड़े गए पानी की मात्रा में भी गिरावट आई है। ऐसी स्थिति में इसे मामूली वृद्धि माना जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के प्रभारी राकेश कुमार का कहना है कि अब यमुना सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही है। ऊपरी क्षेत्र से भी पानी की मात्रा बेहद कम हो गई है। फिलहाल चिंता की बात नहीं है।
घाटों पर जमा गंदगी को यमुना में बहा रहे लोग
यमुना के घाटों पर जमा सिल्ट को नगर निगम द्वारा अभी तक हटाए न जाने के बाद स्थानीय लोग उसे पानी में ही बहा रहे हैं। इससे घाटों के नीचे एक बार फिर सिल्ट जमा होने की स्थिति बन गई है। यमुना प्रदूषण मुक्ति अभियान चलाने वाले भी इसका संज्ञान नहीं ले रहे हैं।