- राम मंदिर के नाम पर 1991 से चुनाव लड़ते रहे फक्कड़ बाबा
- 2021 में निधन, 1991 से लोकसभा और 1977 से विधानसभा चुनाव में हर बार लड़े
- कानपुर के रहने वाले थे मूलरूप से
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। 33 वर्ष में ऐसा पहली बार है जब, लोकसभा के चुनावी रण में इस बार फक्कड़ बाबा नहीं हैं। राम मंदिर के नाम पर 1991 से लोकसभा चुनाव लड़ते रहे फक्कड़ बाबा का 2021 में निधन हो गया। 1991 से लोकसभा और 1977 से विधानसभा के लिए हर चुनाव लड़े फक्कड़ बाबा कानपुर के रहने वाले थे और संन्यासी बनकर मथुरा आए थे। उन्होंने सभी चुनाव अपने गुरु के आदेश पर मथुरा से लडे़ थे।
विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन हो रहा हो और फक्कड़ बाबा नामांकन करने कलक्ट्रेट न पहुंचे, यह संभव नहीं था। चुनाव आते ही फक्कड़ बाबा रामायणी की याद आना भी लाजमी है। उनके अनुयायी बताते हैं कि फक्कड़ बाबा मूलत: कानपुर की बिल्हौर तहसील के रहने वाले थे। वह बचपन में ही घर-परिवार त्याग कर संन्यासी बन गए थे। उन्होंने जीवन भर लोगों के घर-घर जाकर रामायण पाठ और कीर्तन किया। यजमान उन्हें स्वेच्छा से दक्षिणा देते थे, उनकी कोई मांग नहीं होती थी।
2019 में लड़ा था अंतिम चुनाव
श्रीकृष्ण जन्मस्थान के निकट स्थित गल्तेश्वर महादेव मंदिर पर डेरा जमाए रहे फक्कड़ बाबा रामायणी ने 1977 से लेकर अपने जीवन में आठ बार मथुरा से विधानसभा और नौ बार लोकसभा का चुनाव लड़ा। उन्होंने 2019 का अंतिम चुनाव हेमामालिनी के खिलाफ लड़ा था। हालांकि उनकी जमानत भी जब्त होती रही। वह राम मंदिर के लिए वोट मांगते थे। फक्कड़ बाबा कहते थे कि उनके गुरु ने कहा था कि वो 20वीं बार चुनाव जीत जाएंगे। लिहाजा गुरु आज्ञा का पालन कर रहे हैं। निश्चलानंद सरस्वती उनके गुरु थे।