मथुरा। राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को दाखिला देने में टरकाने वाले विद्यालयों पर बीते वर्ष नोटिस जारी होने का इस सत्र में असर दिखाई दिया है। आरटीई के तहत सत्र 2024-25 के लिए 1247 आवेदन आए थे। इनमें से 1071 निर्धन परिवारों के बच्चों को विद्यालयों में दाखिला मिला है। दाखिला देने वालों में सीबीएसई और यूपी बोर्ड के विद्यालय शामिल हैं।
2024-2025 में आरटीई के तहत चार चरणों में छात्रों को निजी स्कूलों आवंटित किए गए। प्रथम चरण में 457 आवेदनों के सापेक्ष 384, दूसरे चरण में 510 आवेदनों के सापेक्ष 428 तृतीय चरण में 203 आवेदनों के सापेक्ष 189, चतुर्थ चरण में 77 आवेदनों के सापेक्ष 70 छात्रों को मनपसंद विद्यालय आवंटित किए गए। हालांकि 176 आवेदकों ने पसंद का विद्यालय न होने के कारण अपने बच्चों का दाखिला नहीं कराया है।
आठ साल में 17 से 1071 पहुंची संख्या
आठ वर्षों में योजना के तहत कुल 4639 आवेदन हुए। इनमें में 2516 छात्रों को पसंद के विद्यालय में प्रवेश दिया गया है। जबकि इन आठ वर्षों में 2123 अभिभावकों ने पसंद का स्कूल न मिल पाने के कारण बच्चे के स्कूल में प्रवेश नहीं दिलाया। बेसिक शिक्षा विभाग के बीते साल के आरटीई के आंकड़ों पर गौर करें तो सत्र 2017-18 में 70 आवेदन आए थे, 17 छात्रों को दाखिला मिला था। 2018-19 में 221 आवेदन के सापेक्ष 74, 2019-20 में 353 आवेदन के सापेक्ष 147, 2020-21 में 442 आवेदन के सापेक्ष 102, 2021-22 में 356 आवेदन के सापेक्ष 157, 2022-23 में 690 आवेदन के सापेक्ष 375, 2023-24 में 1260 आवेदन के सापेक्ष 787, 2024-25 में 1247 आवेदन के सापेक्ष 1071 विद्यार्थियों को दाखिला मिला। बीएसए सुनील दत्त ने बताया कि आरटीई के पालन कराने के लिए अधिकारी निजी स्कूलों पर पूरी सख्ती दिखा रहे हैं। आनाकानी पर तत्काल स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजा जा रहा है। संचालक की गलती पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।