मथुरा। 25 फरवरी की रात रिफाइनरी में टावर संख्या पांच के पास मिले ड्रोन को आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) ने वापस भेज दिया है। एफएसएल के अधिकारियों का कहना है कि उनके यहां ड्रोन जांच की तकनीक नहीं है। अब पुलिस इसकी जांच के लिए डीजीसीए व अन्य एजेंसियों के विकल्प तलाश रही है।
रिफाइनरी की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के आरक्षक जीडी शामला को 25 फरवरी की रात करीब 9:20 वॉच टावर नंबर 5-6 के बीच अचानक कुछ गिरने की आवाज सुनाई दी थी। मौके पर जाकर देखा तो वहां एक संदिग्ध ड्रोन जमीन पर पड़ा हुआ मिला था। उन्होंने मामले में रिफाइनरी थाना में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस जांच में इसका वजन 97 ग्राम पाया गया है। जानकारी की गई तो पता लगा कि इतनी कम गुणवत्ता के ड्रोन को उड़ाने को किसी अनुमति व ड्रोन उड़ाने वाले को लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है।
कई विशेषज्ञों से राय लेने पर पता लगा है कि इस प्रकार की गुणवत्ता वाले ड्रोन का इस्तेमाल शादी-समारोह में वीडियोग्राफी के लिए किया जाता है। बाद में इसे जांच को आगरा एफएसएल भेजा। पुलिस का मानना है कि फॉरेंसिक जांच में ड्रोन के कैमरे के फुटेज देखे जा सकेंगे। साथ ही उसका तकनीकी रूप से परीक्षण भी किया जा सकेगा। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि ड्रोन वास्तव में जासूसी या अन्य किसी खुराफात के उद्देश्य से उड़ाया गया था या फिर यह शादी में वीडियोग्राफी में इस्तेमाल हो रहा था। सीओ श्वेता वर्मा ने बताया कि ड्रोन को एफएसएल जांच को भेजा गया था। वहां से उसे वापस किया गया है। अन्य एजेंसियों से जांच कराने पर विचार चल रहा है।