मथुरा। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत 53 अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) का दो माह को वेतन रोक दिया है। इस कार्रवाई से सभी एआरपी परेशान हैं। विभाग में कार्यरत सभी एआरपी का अप्रैल माह का वेतन आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करने तथा शारदा पोर्टल पर फीड कराने के संबंध में लापरवाही पर रोक दिया था। एआरपी का कहना है कि यह कार्य विद्यालय के अध्यापकों को करना था। जबकि एआरपी को सिर्फ मॉनिटरिंग करनी थी। इसके बावजूद सभी एआरपी को जिम्मेदार ठहराते हुए उनका वेतन रोक दिया गया।
एआरपी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि काम पूरा होने की स्थिति में लगा कि अब अप्रैल का वेतन जारी हो जाएगा, लेकिन जिलाधिकारी ने एआरपी को यूडायस पोर्टल पर विद्यालयों का डाटा अपडेट करने का कार्य दे दिया। यह काम करने की जिम्मेदारी संकुल प्रभारियों की है। हालांकि इसके बाद भी प्रयास किया जा रहा है, लेकिन निजी विद्यालय संचालक गर्मी की छुट्टियों में लंदन, बैंकाक, गोवा सहित अन्य स्थानों पर घूमने के लिए निकल गए हैं।
ऐसे में यूडायस पोर्टल का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके चलते मई माह का वेतन भी डीएम द्वारा रोक दिया गया है। कोई भी अधिकारी उनकी समस्या को समझने के लिए तैयार नहीं है। दो माह का वेतन रोकने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हाउस लोन, कार लोन या अन्य लोन की ईएमआई नहीं भर पा रही है। एआरपी ने बताया कि निलंबन की स्थिति में भी कर्मचारी को आधा वेतन जीवन निर्वाह के रूप में मिलता है लेकिन यहां तो सारा वेतन ही रोक दिया जा रहा है।