फरह। केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें 8 राज्यों के वैज्ञानिकों और हितधारकों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। चर्चाओं में भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
डॉ. बीएन त्रिपाठी, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने उद्घाटन कार्यक्रम में प्राकृतिक बकरी पालन के लाभ और निर्यात से जुड़ी संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों से इस क्षेत्र में शोध पर जोर देने को कहा। एपीडा के महानिदेशक डॉ. वीके विद्यार्थी ने बकरी के दूध और मांस के निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की। बकरी पालकों के उत्पादों के निर्यात में हर संभव मदद का आश्वासन दिय।
मुख्य महानिदेशक नाबार्ड एसके डोरा ने पशुपालन के क्षेत्र में चलाई जा रही योजनाओं पर प्रकाश डाला। संस्थान के निदेशक डॉ मनीष कुमार चेतले ने प्राकृतिक बकरी पालन की दिशा में संस्थान के चल रहे प्रयासों की चर्चा की। समन्वयक डॉ. अशोक कुमार ने कार्यशाला के महत्व को समझाया। समापन डॉ. एसपी किमोथी, सदस्य (पशु विज्ञान), कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा किया गया। इस अवसर पर पौधरोपण एवं किसानों को उन्नत बकरियों और उत्पादों से अवगत कराने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बकरी पालकों को आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। संवाद