मथुरा। जिले में 25 करोड़ से अधिक के घोटाले में फंसे करीब 67 इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आईटीआई) संचालकों की मुश्किल बढ़ेंगी। इन संस्थानों में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के नाम पर घोटाला पाया गया था, जिसकी जांच शासन ने आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपी थी। तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर ने मथुरा के सदर बाजार थाने में मुकदमा कराया था। इसमें पूर्व समाज कल्याण अधिकारी व कर्मचारी समेत चार लोग आरोपी हैं।
तहरीर के मुताबिक मथुरा के 62 निजी आईटीआई में वर्ष 2015-16 और 2019-20 में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति दी गई थी। इनमें जमकर अनियमितता की गई। आरोप था कि पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी, पटल सहायक नवीन मेहरोत्रा, कनिष्ठ सहायक योगेश कुमार और सहायक विकास अधिकारी राहुल कुमार ने इन संस्थानों से मिलीभगत करके 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि का गबन व फर्जीवाड़ा किया। आरोपियों को निलंबित किया जा चुका है। विभागीय जांच के मुताबिक फर्जी दस्तावेज तैयार कर छात्रों की संख्या बढ़ाकर व अपात्रों के नाम पर भी छात्रवृत्ति जारी की गई। मान्यता विहीन संस्थानों में छात्र-छात्राओं के नाम से आवेदन कर धनराशि का गबन किया गया। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके साथ ही, भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा संबंधित संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर कराई गई।