वृंदावन। बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। यमुना में जलस्तर घटने के साथ ही भक्तों की संख्या भी बढ़ने लगी है। शनिवार को आलम यह रहा कि मंदिर की सकरी गलियों से लेकर मंदिर के चौक तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
भीड़ के दबाव, मार्गों पर अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं के कारण यहां आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की दर्शन के समय सांस गले में आ जाते हैं। प्रशासन ने गत वर्ष जन्माष्टमी की रात हुए हादसे के बाद भी सबक नहीं लिया है और न ही कोई सुधारात्मक कदम उठाया गया। इसे लेकर मंदिर के गोस्वामीजन भी हैरानी में है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में न सिर्फ छुट्टी वाले दिन शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं बल्कि सप्ताह के अन्य दिनों में भी भीड़ का आलम कुछ ऐसा ही रह रहा है। शनिवार को मंदिर की ओर जाने वाली गली से लेकर अंदर तक श्रद्धालुओं में मारामारी रही। श्रद्धालु एक-दूसरे को धक्का देकर आगे बढ़ते नजर आए। इसमें उन लोगों की हालत और ज्यादा खराब थी, जिनके पास बच्चे थे और जो वृद्ध थे। भीषण गर्मी और उमस के बीच भीड़ में फंसे बच्चे चीखने लगे।
वृद्ध महिलाएं भी भीड़ के दबाव को सहन नहीं कर सकी। बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत अशोक गोस्वामी का कहना है कि मंदिर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं है। 20 अगस्त 2022 को मंदिर में भीड़ के दबाव के बीच दो श्रद्धालुओं की मौत और कई घायल हो जाने की घटना से भी सबक नहीं लिया गया है। इस हादसे की जांच के लिए शासन ने कमेटी गठित की, लेकिन एक वर्ष होने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है न ही ऐसे हादसे फिर न हो इसके लिए कोई सुधारात्मक कदम उठाए गए। सेवायत गोस्वामी ने शासन से मांग की है कि इस मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि मंदिर की व्यवस्था में सुधार हो सके।