जवाहर बाग के कब्जाधारियों को मिर्ची, खांसी स्प्रे और आंसू गैस के गोले छोड़कर हताश करने की योजना भी हवा के बदले रुख ने फेल कर दी थी। प्रशासन और पुलिस अधिकारी करीब एक माह से इसकी रणनीति बना रहे थे।
चार मई को तहसील परिसर में कब्जाधारियों द्वारा मारपीट करने के बाद इसे खाली कराए जाने के लिए पहली बार प्रशासन की ओर से कड़ी पहल हुई। आलाधिकारियों के बीच बैठकों का दौर चला।
इसमें जवाहर बाग में जमे कब्जाधारियों को हटाने के लिए होने वाली कार्रवाई में पुलिस द्वारा पहले मिर्ची स्प्रेे, खांसी स्प्रे और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया जाना था। लेकिन गुरुवार शाम को अचानक उम्मीद के विपरीत हुई कार्रवाई पुलिस पर ही भारी पड़ गई। पुलिस ने स्प्रे का प्रयोग करने का प्रयास किया तो हवा का रुख उनकी ही ओर था। इससे पुलिसकर्मियों को ही परेशानी होने लगी तो इसका प्रयोग बंद कर दिया गया।
भय के साए में गुजरा डेढ़ साल
जवाहर बाग से सटकर बनी जवाहर बाग कालोनी में रह रहे करीब 400 लोगों का बीते डेढ़ साल में जीना मुश्किल हो गया था। दिन भर सहमे सहमे से रहने वाले ये लोग रात को तो कमरे से भी बाहर नहीं निकलते थे। जवाहरबाग आपरेशन होने के बाद अब इन्हें खुशी का अहसास हो रहा है।
जिला मुख्यालय पर सिविल लाइन क्षेत्र में ही जवाहर बाग से सटी जवाहर बाग कालोनी में विभिन्न विभागों के करीब 72 कर्मचारी परिवार रहते हैं। इनमें सदस्यों की संख्या करीब 400 के आसपास है।
ढाई साल पहले जब जवाहर बाग पर स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के लोगों ने कब्जा किया तो जवाहर बाग कालोनी के लोग तमाशा देखने पहुंचते थे। लेकिन एक साल बाद कथित सत्याग्रहियों द्वारा एक के बाद एक घटना को दिए गए अंजाम ने जवाहर बाग कालोनी वासियों को भयभीत कर दिया।
पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर हुए हमलों से पिछले छह माह से तो यहां के लोग इस कदर भयभीत हो गए कि बच्चों को दिन में भी सावधानी पूर्वक निकलने देते थे। रात को तो भय का आलम ऐसा रहता था कि घर की चाहरदीवारी में बने शौचालय तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।
इस दौरान रात को थोड़ी सी भी किसी प्रकार की आहत लोगों को हिला देती थी। पूरा परिवार सहम जाता था। एक दूसरे को फोन करके प्रत्येक गतिविधि की जानकारी देते थे। हाल ही में आयोजित हुई बोर्ड परीक्षाओं में हाईस्कूल और इंटर के बच्चों ने परिचितों के घरों में रहकर परीक्षाएं दीं। आपरेशन होने के बाद अब लोग इस गुजरे वक्त को बुरा सपना मानते हैं।
लखनऊ से दिल्ली तक की राजनीति गरम
जवाहर बाग ने प्रदेश में राजनीति में भूचाल ला दिया है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की राजनीति जवाहरबाग को लेकर गरमाई हुई है। आगामी विधानसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए सभी विपक्षी दल सीधे मुख्यमंत्री पर हमला बोल रहे हैं।
बीते डेढ़ साल से जिला प्रशासन शासन को अवगत कराता रहा है कि जवाहर बाग पर कब्जा करने वालों की नीयत ठीक नहीं हैं। इनकी गतिविधियां पूरी तरह से संदिग्ध हैं। जनवरी 2015 से शुरू हुआ शासन को अवगत कराने का दौर आपरेशन से ठीक दो दिन पहले तक जारी रहा।
इस दौरान जिला प्रशासन के स्तर से करीब 8 से 10 पत्र प्रमुख सचिव स्तर के अफसरों को भेजे गए। इसमें प्रत्येक स्थिति से अवगत कराते हुए हालात सामान्य नहीं बताए गए। प्रत्येक रिपोर्ट में जवाहर बाग कब्जाने वालों पर हथियारों की मौजूदगी दर्शाई गई।
इसमें एक पत्र मुख्य सचिव को कमिशभनर आगरा के स्तर से भी भेजा गया, जिसमें जनता की ओर से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया। लेकिन शासन में बैठे लोगों ने उफ तक नहीं की।
आज दो अफसरों के साथ 27 लोगों की मौत के बाद यही सवाल उत्तर प्रदेश सरकार के लिए मुसीबत बन गए हैं। इन्हीं सवालों को उठाते हुए भाजपा और कांग्रेस के बडे़ नेता मथुरा पहुंच गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने जवाहर बाग कब्जाने में मुख्यमंत्री के परिवार की ही सहभागिता का आरोप लगा दिया है।
अब भाजपा धरना प्रदर्शन के माध्यम से जवाहर बाग को लेकर राज्य सरकार को घेरने जा रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा सरकार भू-माफियाओं से गठबंधन करके जमीने कब्जा रही है।