रेलवे में अवैध वेंडर्स का बोलबाला है। ट्रेनों में नकली पेड़ा-पेठा और खानपान की वस्तुओं की ब्रिकी इन्हीं वेंडर्स के सहारे की जाती है। बताया गया है कि वैध वेंडिंग की आड़ में अवैध वेंडिंग का यह धंधा संगठित समूह का रूप ले चुका है। ट्रेनों में नकली सामान की बिक्री का कारोबार इतना पहुंच गया है कि अब इसके लिए ठेकेदारों के गुटों में रंजिश पनपने लगी है। शुक्रवार की रात थाना हाईवे क्षेत्र में युवक को गोली मारने में भी यही कारण उभर कर आ रहा है।
बता दें कि रेलवे लंबी दूरी की ट्रेनों में खानपान की वस्तुओं की बिक्री के लिए निविदाएं जारी करता है। इस आधार पर चयनित वेंडर ही ट्रेन में सामान की बिक्री करते हैं। इनकी आड़ में कम दूरी के लिए कई अवैध वेंडर भी ट्रेनों में सामान बेचते हैं। इन वेंडर्स पर क्वालिटी और चीजों के दाम को लेकर कोई अंकुश नहीं रहता। रेलवे में सामान की बिक्री के लिए से वेंडर अब संगठित रूप में कार्य करने लगे हैं।
चोरी छिपे ट्रेनों नकली सामान की बिक्री के ठेके दिए जा रहे हैं। रेलवे की वाणिज्यिक शाखा और सुरक्षा बल भी इन तक नहीं पहुंच पा रहे। यह कारोबार प्रतिमाह लाखों की कमाई का जरिया बन गया है। यही कारण है कि अब इनका ठेका लेने के लिए ठेकेदारों में रंजिश पनपने लगी है। कारोबार पर पकड़ बनाए रखने के लिए ठेकेदार एक दूसरे की जान लेने पर उतर आए हैं। शुक्रवार को रात में थाना हाईवे क्षेत्र में जगदीश प्रधान को गोली मारने के पीछे भी यही कारण बताया जा रहा है।
निजामुद्दीन से कोसी तक कारोबार
रेलवे सूत्रों के अनुसार जिले के एक ठेकेदार का मथुरा से हजरत निजामुद्दीन स्टेशन के बीच अवैध वेंडिंग के कारोबार पर कब्जा था। आरपीएफ और जीआरपी की निगरानी के चलते अब उसने कारोबार निजामुद्दीन स्टेशन पर शिफ्ट कर लिया है। अब निजामुद्दीन स्टेशन से फरीदाबाद और कोसी रेलवे स्टेशन तक यह कारोबार जारी है। ठेकेदार के अधीन करीब 250 लोग कार्य कर रहे हैं।
57 पर मार्च माह में हुई कार्रवाई
लंबी दूरी की गाड़ियों में सामान की अवैध रूप ये बिक्री करने वालों को जीआरपी-आरपीएफ के संयुक्त अभियान में पकड़ा गया था। मार्च माह में ही करीब 57 वेंडर्स पकडे़ गए। इनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की गई। शुक्रवार को भी स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस से आरपीएफ ने चार अवैध वेंडर्स को करीब 15 किग्रा पेठे के साथ पकड़ा था।
ट्रेनों में लूट की वारदात में शामिल हैं अवैध वेंडर्स
आरपीएफ और जीआरपी के अनुसार ट्रेनों में होने वाली लूट और चोरी की 80 प्रतिशत वारदातों को अवैध वेंडर्स ही अंजाम देते हैं। रेलवे के पास इनका रिकार्ड न होने के कारण इन्हें पकड़ना भी मुश्किल रहता है।
अवैध वेंडर्स के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है, जिससे ताकि यात्रियों की सुरक्षा को खतरा न हो। मार्च माह में भी बड़ी संख्या में इन वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
सतेंद्र यादव
आरपीएफ निरीक्षक