यमुना एक्सप्रेसवे पर एक्सीडेंट के बाद हुए बवाल में एसपी देहात को फंसा छोड़कर भागे एसओ बलदेव तेजवीर सिंह को एसएसपी ने निलंबित कर दिया है। बीते चार माह में तेजवीर सिंह को दूसरी बार निलंबित किया गया है। एसएसपी ने एक्सप्रेसवे पर प्रकरण की जांच एसपी सिटी को सौंपी है। सीओ महावन को एसओ द्वारा पुलिस अधिकारी पर लगाए आरोपों की रिपोर्ट देने को कहा है।
बता दें कि बीते शुक्रवार को बलदेव थाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे पर एक्सीडेंट में आगरा निवासी पिता-पुत्र की मौत के बाद गांव के लोगों ने जाम लगा दिया था। सूचना के बाद भी एसओ बलदेव तेजवीर सिंह यादव मौके पर नहीं पहुंचे थे। बताया गया है कि सीओ महावन और एसपी देहात के पहुंचने के बाद मौके पर गए तेजवीर ने अधिकारियों का सहयोग नहीं किया और पथराव में फंसे एसपी देहात को छोड़कर भाग खड़ा हुआ।
एसपी के रोकने पर उनसे अभद्रता भी कर डाली। इतना ही नहीं उसने अधिकारी के खिलाफ थप्पड़ मारने और गाली देने का तस्करा जीडी में डाल दिया। एसपी ने मामले की सूचना एसएसपी को देते हुए एसओ के निलंबन की संस्तुति कर दी थी। सोमवार को एसएसपी डा. राकेश सिंह ने तेजवीर को निलंबित कर दिया। पूरे प्रकरण की जांच एसपी सिटी शैलेश पांडेय को सौंपी है।
इसके अलावा एसओ तेजवीर सिंह द्वारा थाने की जीडी में पुलिस अधिकारी के खिलाफ गाली देने और थप्पड़ मारने का तस्करा डाल देने की रिपोर्ट सीओ महावन से देने को कहा है। एसएसपी डा. राकेश सिंह ने बताया कि पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई रिपोर्ट के बाद इस पर अमल किया गया।
कार्य में लापरवाही का तेजवीर सिंह के खिलाफ बीते चार माह में दूसरा मामला है। इससे पहले फरह थानाध्यक्ष रहते हुए गांव परखम में हुए वबाल के कारण डीआईजी ने निलंबित करने के आदेश किए थे। 28 जुलाई के इस मामले में गांव की बालिका से दुराचार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। बाद में ग्रामीणों ने दुराचार के आरोपियों को परखम चौकी से खींच कर पीटा था। इनमें से एक की मौके पर ही मौत हो गई थी। अक्तूबर माह में बहाली के बाद तेजवीर ने 10 दिन पहले ही बलदेव थाने का चार्ज लिया था। यहां भी लापरवाही सामने आई।
आईजी, डीआईजी तक पहुंचा मामला
यमुना एक्सप्रेसवे पर जाम, पथराव और फायरिंग के मामले में एसओ बलदेव तेजवीर सिंह यादव की लापरवाही और अभद्रता के मामले से एसपी ने आईजी और डीआईजी को अवगत कराया है। वृंदावन में राष्ट्रपति के आगमन के संदर्भ में हुई पुलिस ब्रीफिंग के बाद आईजी डीसी मिश्र और डीआईजी लक्ष्मी सिंह के समक्ष एसपी ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद डीआईजी ने एसएसपी को जांच कराकर कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया था।