पुलिस-प्रशासन का गुरुवार को जवाहर बाग में कार्रवाई का इरादा ही नहीं था। अफसरों ने तय किया था कि या तो देर रात या फिर शुक्रवार तड़के फोर्स जवाहर बाग में दाखिल होगी और कब्जाधारियों को खदेड़ देगी। गुरुवार को अधिकारी केवल जवाहर बाग में घुसने के लिए बाउंड्री तोड़ने गए थे। जेसीबी से बाउंड्री को तोड़ा जा रहा था। इसी बीच पुलिस पर हमला हो गया।
दरअसल जवाहर बाग को खाली कराने के लिए बीते एक महीने से रिहर्सल चल रहा था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी फोर्स लेकर पहुंचते और बाग के इधर उधर घूमकर लौट आते। कोई कार्रवाई न कर पाने के कारण प्रशासन की भी फजीहत हो रही थी।
यही वजह थी कि गुरुवार को आपरेशन जवाहर बाग चलाने का फैसला कर लिया गया। तय हुआ कि जवाहर बाग में घुसने का सुरक्षित रास्ता बना लिया जाए। शाम को अधिकारी भारी फोर्स के साथ जेसीबी लेकर जवाहर बाग पहुंचे और बाउंड्री को तोड़ना शुरू कर दिया।
यह देखते ही जवाहर बाग में जमे कथित सत्याग्रहियों की ओर से फायरिंग शुरू कर दी गई। पुलिस को इस हमले की उम्मीद ही नहीं थी। पहली दफा तो पुलिस यहां से भाग खड़ी हुई। जब फोर्स बढ़ा तो कार्रवाई शुरू की गई।