दलित किशोर की हत्या के आरोपी की गिरफ्तारी के विरोध में थाना मांट के बाहर लगाए गए जाम को खुलवाने के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। ग्रामीणों ने थाने में घुसकर पुलिस कर्मियों को पीटना शुरू कर दिया। अचानक हुए इस हमले से घबराए पुलिस कर्मी थाने से भाग खड़े हुए। ग्रामीण पुलिस कस्टडी से हत्यारोपी को छुड़ाकर फरार हो गए। मामले में गांव नानकपुर निवासी 14 लोगों और 30-35 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
घटनाक्रम रविवार का है। फजीहत से बचने के लिए पुलिस मामले को दबाए रही और आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास करती रही, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आए है। थाना नौहझील के गांव नानकपुर में 24 दिसंबर 2016 को दलित किशोर बलवीर (13) का शव मिला था।
इस मामले में गांव के ही एक युवक रमेश का नाम जांच में सामने आ रहा था। रविवार को थाना नौहझील पुलिस ने उसे पकड़ लिया और हंगामे की आशंका के चलते पुलिस उसे लेकर थाना मांट चली गई। रमेश पक्ष के लोग थाना मांट पर पहुंच गए। पहले उसे छुड़ाने के लिए हंगामा किया, उसके बाद थाने के बाहर जाम लगा दिया।
पुलिस ने जाम खुलवाने और थाने के बाहर से उन्हें हटाने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने उनपर हमला बोल दिया। पुलिसकर्मी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हमले में नौहझील थाने के तीन सिपाही पंकज सिंह, विजय यादव और मुकेश घायल हो गए। ग्रामीणों के रमेश को छुड़ाकर फरार हो जाने बाद छिप गए पुलिसकर्मी बाहर आए और घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। इस मामले में प्रभारी निरीक्षक नौहझील राघवेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
ढाई माह पूर्व मिला था किशोर का शव
थाना नौहझील के गांव नानकपुर में 24 दिसंबर 2016 को दलित किशोर बलवीर (13) का शव मिला था। प्रभारी निरीक्षक थाना नौहझील ने बताया कि किशोर की हत्या में रमेश का नाम जांच के बाद प्रकाश में आया था। इसे पुलिस पकड़कर थाना मांट ले गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने थाने में पुलिस पर हमला बोला है।
पुलिस हमले में यह हुए नामजद
रमेश, जीवन, रोशन मास्टर, पप्पू, दिगंबर, रिंकू, पूरन, आनंद, हरकेश, बिजेंद्र, दीवान, सतेंद्र, नेम सिंह, रंधीर और 30-35 अज्ञातों पर धारा 147, 148, 332, 353, 307, 504, 506, 225, 224 के अलावा 188 आईपीसी में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
-हत्यारोपी को पकड़कर लाई पुलिस पर हुए हमले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। नामजद आरोपी को छुड़ाकर ले गए हैं। जल्द ही हमलावरों की गिरफ्तारी की जाएगी।
-अरुण कुमार सिंह, एसपी देहात
पूर्व में हुए पुलिस पर हमले
-मई 2013 में बरसाना के गांव हाथिया में स्वाट टीम पर हमले में सिपाही सतीश परिहार की हत्या।
-जुलाई 2014 में श्रीधाम एक्सप्रेस ट्रेन में पुलिस पर हमला, सिपाही और आरोपी को मारा, राइफल लूटी।
-मार्च 2015 में अंबेडकर प्रतिमा तोड़ने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने जमुनापार पुलिस पर किया हमला।
-जुलाई 2015 में फरह के गांव परखम पुलिस पर हमलाकर आरोपी छुड़ाए।
-नवंबर 2015 गोकुल बैराज पर हुआ पुलिस पर हमला, छह पुलिसकर्मी हुए घायल।