नास्तिक सम्मेलन के आयोजक स्वामी बालेंदू द्वारा बीते धार्मिक ग्रंथों पर विवादित टिप्पणी के मामले में मिले प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। रविवार शाम अटल्ला चुंगी पर बालेंदू के खिलाफ कार्रवाई न होने पर संतों द्वारा लगाए गए जाम के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई।
सोमवार को कोतवाली पुलिस ने नास्तिकता सम्मेलन से जुडे़ तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। बताया गया है कि नास्तिक सम्मेलन की अनुमति, मीडिया के बीच की गई ग्रंथों पर विवादित टिप्पणी, 14 अक्तूबर को अम्माजी होटल पर संतों के प्रदर्शन, रात में बालेंदू के आश्रम पर एकजुट हुए नास्तिकों की मौजूदगी आदि जानकारियां पुलिस जुटा रही है।
रात के अंधेरे में सम्मेलन करने के साथ एक दिन बाद मीडिया को दिए गए स्पष्टीकरण में भी विरोधी बयान दोबारा दिए जाने पर संतों के भड़के आक्रोश को लेकर पुलिस गंभीर नजर आ रही है। पुलिस ने संतों के अलावा अन्य संगठनों की ओर से मिले कई प्रार्थना पत्र जांच शुरू की।
कोतवाली प्रभारी का कहना है कि 14 अक्तूबर को बालेंदू ने प्रशासनिक अधिकारियों और संतों की मौजूदगी के बीच नास्तिक सम्मेलन रद्द करने की बात लिखित में दी थी। जांच में पता चला है कि इसके बाद कोई सम्मेलन नहीं हुआ। इधर पुलिस बवाल करने वाले लोगाें की भी सूची तैयार कर रही है। वहीं अम्माजी होटल पर अब भी पुलिस का पहरा है।