रिफाइनरी की पाइप लाइन में सेंधमारी करके तेल चोरी का काला कारोबार वर्षों से चला आ रहा है। मथुरा के कई सफेदपोश इसमें शामिल रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस को पता नहीं होता। सब जानते हैं लेकिन उन्हें खामोश रहने का पैसा दिया जाता है। वर्ष 2011 में रिफाइनरी की पाइप लाइन से तेल चोरी की शिकायतों की जांच कराने वाले रिटायर्ड डीजीपी ब्रजलाल ने ये खुलासा किया है। उनका कहना है कि कई पुलिस अधिकारी भी माफिया को बचाने के लिए खड़े हो जाते थे।
मथुरा की रिफाइनरी से पेट्रोल, डीजल, एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की सप्लाई पाइप लाइन के जरिए होती है। मथुरा-जालंधर, मथुरा-गुजरात, मथुरा-टूंडला और मथुरा से भरतपुर-जयपुर के लिए पाइप लाइन बिछी हुई हैं। इन पाइप लाइन से तेल चोरी की घटनाएं होती रही हैं। तेल चोरी के समय प्रेशर कम हो जाने के कारण रिफाइनरी में अलार्म बज जाता है लेकिन फिर भी कोई ध्यान नहीं देता।
रिटायर्ड डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि जब वो डीजीपी थे तब भी मथुरा रिफाइनरी से तेल चोरी के मामले सामने आए थे। हमने एक पूरा गैंग पकड़वाया था। लेकिन हमारे ही कुछ बड़े पुलिस अधिकारी तेल माफिया को बचाने के लिए खड़े हो गए थे। जांच में पुलिस अफसरों का तेल माफिया से गठजोड़ पाया गया था। रिफाइनरी वालों की मिलीभगत न हो ये भी संभव नहीं है।
रिटायर्ड डीजीपी एके जैन ने बताया कि एक बार पेट्रोलियम विभाग के बड़े अफसर उनसे मिले थे। पाइप लाइन से तेल चोरी होने की बात सामने आई थी। तब हमने अभियान चलवाया था। कई ढाबे वाले भी इस तेल के कारोबार में लिप्त पाए गए थे। तेल माफिया ने हाईवे किनारे के ढाबों को किराए पर ले रखा था। यहीं से पाइप लाइन तक सीधे सुरंग बना रखी थी। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों को सब पता होता है लेकिन वो लिप्त रहते हैं लिहाजा खामोश रहते हैं।